यात्री परिवहन व बस मालिकों के लिए यह साल है अहम

15 वर्ष पुराने वाहन होंगे स्क्रैप
अधिकतर रूटों में 20% तक बसें हुईं कम, 2 वर्षों में नहीं उतरी कोई नॉन एसी बस
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक तरफ सरकार प्रदूषण कम करने के लिए ई-वाहनों पर जोर दे रही है तोे वहीं दूसरी ओर, बसों की संख्या लगातार कम होने के कारण बस मालिक परेशान हैं। कोविड काल के कारण यूं ही सामूहिक परिवहन काफी नुकसान से गुजरा था। वहीं वर्ष 2018 के बाद बसों के किराये में भी कोई वृद्धि नहीं की गयी जिस कारण मालिकों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इन सब कारणों से गत 2 वर्षों में कोई नॉन एसी बस निजी बस मालिकों द्वारा सड़कों पर नहीं उतारी गयी।
इन कारणों से बसें हुईं कम
सिटीसबर्बन बस सर्विसेज के टीटो साहा ने सन्मार्ग से कहा, ‘एक ओर बसों के किराये में कोई वृद्धि नहीं की गयी तो वहीं पुलिसिया अत्याचार भी लगातार जारी हैै। बसों के विभिन्न कल-पुर्जों के दाम बढ़ गये हैं, लेकिन आमदनी नहीं बढ़ी है। पुलिस की फाइन दाेगुनी से भी अधिक हो गयी है। जिस सीएफ फेल के लिए 1 हजार रु. लगते थे, वहीं अब उसके लिए 10,000 रु. तक का जुर्माना है।’ इन कारणों से एसडीएफ 18, 45, 46, 235 समेत अधिकतर बस रूटों में बसों की संख्या 20% तक कम हाे गयी है।
15 साल से पुरानी बसों को किया जा रहा स्क्रैप
ऑल बंगाल बस मिनी बस समन्वय कमेटी के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा, ‘15 वर्ष से पुरानी बसों को स्क्रैप किया जा रहा है। पिछली बार वर्ष 2009 में काफी संख्या में 15 साल से पुरानी बसों को स्क्रैप किया गया था। ऐसे में अब 2023-24 का साल काफी अहम होगा क्योंकि इस समय भी काफी पुरानी बसों को स्क्रैप किया जायेगा। इस कारण बसों की संख्या कम होगी, लेकिन कोई नयी बस नहीं उतर पाने के कारण इसकी भरपाई नहीं हो पा रही है। वैकल्पिक रूटों का गठन नहीं हो रहा है और ना ही पुरानी बसों के बदले में नयी बसें आ रही हैं।’
वीएलटीडी ने रोका बसों का रजिस्ट्रेशन
वीएलटीडी (ह्वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) के नो​टिफिकेशन ने बसों का रजिस्ट्रेशन भी रोक दिया है। बीएस 6 की नयी बसों में वीएलटीडी फिट नहीं होने के कारण बसों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है और नयी बसें सड़कों पर नहीं उतर रही हैं।
2 बार वेकेंसी डिक्लेयर होने पर भी नहीं उतरी बस
परिवहन विभाग की ओर से 2 बार परमिट के लिए वेकेंसी डिक्लेयर होने के बावजूद केवल एक एसी बस ही सड़क पर उतरी। इस दौरान कोई नॉन एसी बस पिछले 2 वर्षों में नहीं उतारी गयी।
नये रूटों के गठन की मांग
बस मालिकों की ओर से नयी बस रूटों के गठन की मांग की जा रही है ताकि कम हाेती बसों की स्थिति में सुधार लाया जा सके। बस मालिकों का कहना है कि अगर नये रूट ही नहीं बनेंगे तो फिर बसों की स्थिति में सुधार लाना संभव नहीं होगा।

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