बड़े नेताओं की जमायत रही, शक्तिप्रदर्शन दिखा कार्यकर्ताओं का

कॉलेज स्ट्रीट से हावड़ा ब्रिज तक अड़े रहे तृणमूल के खिलाफ
भाजपा का नवान्न अभियान
सोनू ओझा
कोलकाता : साल 1993 में ममता बनर्जी ने राइटर्स अभियान किया था। अभियान में ममता के साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता व समर्थकों का समावेश एकजुट हुआ था। बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के इस राइटर्स अभियान को अब तक का सबसे बड़ा अभियान कहा जा सकता है। इसके बाद भी कई अभियान हुए मगर सफल कोई नहीं हो पाया। इस दौरान राज्य में सत्ता बदली, मुख्य सचिवालय का ठिकाना भी बदला। जो राइटर्स अभियान करते थे वह अब नवान्न अभियान में बदल गया। मंगलवार को भाजपा ने नवान्न अभियान किया जिसे सफल तो नहीं कह सकते मगर भगवा का दबदबा कितना बढ़ा है वह देखने-दिखाने का यह बेहतरीन प्लेटफाॅर्म था। नवान्न को तीसरी सुरक्षा में घेरा गया, वहां तक जाने वाले समस्त रास्तों को पुलिस द्वारा घेरेबंदी की गयी। कुल मिलाकर तय था कि हर रास्ते में एक अमुक प्वाइंट पर आकर भाजपा को रोक दिया जाएगा। शायद यही वजह है कि इस अभियान में काफी कुछ बिखरा सा रहा, जहां नेताओं को डंटना था वहां कार्यकर्ताओं की कतार खड़ी दिखी।
दबंग दिलीप ने गिरफ्तारी तक नहीं दी, कार्यकर्ता करते रहे नारेबाजी
दिलीप घोष ने कॉलेज स्ट्रीट से हावड़ा ब्रिज तक पदयात्रा की। इनके जत्थे को हावड़ा ब्रिज के पहले छोर पर ही रोकना था। यहां पहुंचते ही दिलीप घोष कुछ मिनटों में ही वहां से वापसी कर लिये, यह पहले से ही तय था कि वह गिरफ्तार नहीं होंगे। दिलीप आये और चले गये मगर उनके साथ के कार्यकर्ताओं का उत्साह कम न दिखा। आगे का मोर्चा संभालते रहे। संख्या में भले मुट्ठीभर हों लेकिन उनकी नारेबाजी देखकर लग रहा था मानो नवान्न की कुर्सी पर सत्ता का बदलाव करवा ही देंगे।
पुलिस ने चलाया जलकमान, आंसू गैस, भाजपा ने फेंके पत्थर
हावड़ा ब्रिज पर पुलिस द्वारा लगातार माइकिंग की जा रही थी कि यहां यह रैली अवैध है, इजाजत नहीं दी गयी है इसलिए पुलिस अपनी कार्रवाई कर सकती है। रैली करीब 2.15 बजे हावड़ा ब्रिज पर पहुंची, रैली को आते देख पुलिस की ओर से वॉटर कैनन और टीयर गैस छोड़ा गया जबकि दूसरी तरफ से ईंट-पत्थर की लगातार बारिश होती रही। इसमें कुछ कार्यकर्ता के घायल होने की भी खबर थी। कुछ पुलिस वाले भी घायल हुए।
रैली की भीड़ से कहीं ज्यादा था पुलिस बल
कॉलेज स्ट्रीट से हावड़ा ब्रिज तक के रूट में भाजपा की रैली में नेता और कार्यकर्ताओं की भीड़ की बात करें तो वह उतनी नहीं दिखी जितनी उम्मीद की गयी थी। वहीं भाजपा को रोकने के लिए कोलकाता और बंगाल पुलिस की टीम की संख्या काफी अधिक थी। आईपीएस अधिकारी से लेकर तमाम रैंक के पुलिस ऑफिसर मौके पर डटे रहे।

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