धन कुबेर की तरह है शांतनु की संपत्ति, एक दशक में लखपति से कैसे बने अरबपति, ईडी भौचक्का

बालागढ़, चन्दननगर तथा चुंचुड़ा व कोलकाता में है करोड़ों की संपत्ति

मानिक तक रुपये पहुंचाने का है आरोप

मोबाइल दुकान में काम करने से लेकर करोड़ों के मालिक बनने का सफर

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : धन कुबेर की तरह है शांतनु की संपत्ति। ईडी की टीम यह देखकर भौचक्का है। ईडी की टीम ने गत शुक्रवार की रात को 7 घंटे की पूछताछ के बाद तृणमूल के युवा नेता व हुगली जिला परिषद कर्माध्यक्ष शांतनु बंद्योपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया। उसके बारे में ईडी को पता चला है कि वह कभी मोबाइल का सिम भी बेचा करते थे। दुकान में काम किया करते थे। जिराट के कॉलेज में युवा नेता बनने के बाद एसएससी मामले में जब उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने लगे तब से उनकी ठाट-बाट बदल गयी। अभी तो उनके पास करोड़ों की संपत्ति है। यही नहीं विधायक मानिक भट्टाचार्य के भी वे बेहद करीबी हुआ करते थे। कुंतल और मानिक के साथ उनकी काफी अच्छी पकड़ थी। साल 2005 में हुगली जिले के बालागढ़ का रहने वाला युवक शांतनु बनर्जी मोबाइल आदि की दुकानों में काम किया करते थे।

अथाह संपत्ति के मालिक हैं शांतनु

बालागढ़ में बंग्लो से लेकर रिसाॅर्ट से लेकर ढाबा आदि बिजनेस में भी उन्होंने एसएससी से कमाये गये काले धन का निवेश किया था। शांतनु के पिता बिजली विभाग में कार्यरत थे। पिता की मृत्यु के बाद उसे उस कार्यालय में नौकरी मिल गई और धीरे-धीरे शांतनु की राजनीति में एंट्री हुई। उन्हें जिराट कॉलेज में छात्र परिषद की जिम्मेदारी मिली थी। उसके बाद वह ब्लॉक के साथ-साथ जिले में भी तृणमूल छात्र परिषद के नेता बन गये। ईडी के अधिकारियों को ग्रामीण इलाके में शानदार आवास मिला है जिसमें जिम से लेकर सभी सुविधाएं मौजूद हैं। वह हुगली जिले के अलावा शिल्पांचल के पुरुलिया, बर्दवान व बांकुड़ा समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में टीएमसी के पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत रह चुके हैं।

ईडी की टीम को कुछ और ब्रोकरों की है तलाश

ईडी सूत्रों के मुताबिक शांतनु के अलावा जिले स्तर में और कई नेता हैं, जो एसएससी मामले से जुड़े हैं। उन पर ईडी की टीम की नजर है। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक के साथ-साथ संगठित शिक्षकों को नौकरी दिलाने का वादा कर उन उम्मीदवारों से रुपये वसूले जाते थे। सूत्रों की माने तो जब एसएससी मामले में गैरकानूनी तरीके से भर्ती की शुरुआत हुई थी तो कॉलेज के नेताओं तक भी यह जानकारी गयी थी। ऐसे में शांतनु के जरिये कइयों ने मानिक भट्टाचार्य और फिर पार्थ चटर्जी तक अपनी पहुंच बनायी। अब इस मामले में एक – एक नाम बाहर आ रहा है। शांतनु के बालागढ़ के स्थित बंग्लो में ट्रेडमिल, गैरेज और उसमें 2 एसयूवी पार्क देखा गया है। इसके अलावा जिराट में ढाबा, गेस्ट हाउस तथा चंदननगर व चुंचुड़ा में संपत्ति का पता चला है। इसके अलावा मानिक भट्टाचार्य तक वे एसएससी से कमाये गये राशि का कमिशन रखकर मूल राशि पहुंचा देते थे। ऐसे में वे मानिक के गूड बुक में रहा करते थे। कुंतल घोष के वे मेंटर थे। कुंतल का उनसे काफी अच्छा संपर्क था।

मानिक से शांतनु को इसलिए तुलना कर रही है ईडी

युवा तृणमूल नेता प्रति व्यक्ति 4 से 5 लाख रुपये लेते थे। मानिक के घर की तरह, शांतनु के बालागढ़ घर की तलाशी लेने के बाद केंद्रीय अधिकारियों को नौकरी चाहने वालों के नामों की एक बड़ी सूची बरामद हुई थी। शांतनु के बालागढ़ स्थित घर से नौकरी के 312 अभ्यर्थियों के नाम, उनका एडमिट कार्ड, रोल नंबर की सूची बरामद हुई थी। मानिक के फ्लैट से बरामद सूची में कई नाम शांतनु के घर से मिली सूची में भी हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक मानिक ने 312 लोगों में से 20 को स्कूल में नौकरी भी दिलवा दी थी।

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