बालों से तरल खाद बनाकर कमाल कर दिखाया है सोदपुर के स्कूली छात्रों ने

बिना मिट्टी के ही उगायी जा सकती हैं इससे 15 से अधिक सब्जियां, फल-फूल
काफी कम खर्च में किसानों को यह खाद पहुंचाने का ही है लक्ष्य : शिक्षक
सोदपुर : सोदपुर देशबंधु विद्यापीठ के शिक्षकों और छात्रों ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसकी चर्चा न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में हो रही है। उन्होंने मनुष्य के बालों से जैविक तरल खाद बना दिया है ​जिससे बिना मिट्टी के ही 15 तरह की खेती की जा रही है। यह खाद खेती के क्षेत्र में एक वरदान की तरह है क्योंकि मिट्टी में इसका प्रभाव उपलब्ध रासायनिक व जैविक खाद से कहीं अधिक देखने को मिल रहा है। कम लागत में इस खाद की मदद से काफी उन्नत फसल उगाने का दावा स्कूल के शिक्षक व छात्रों का है। बताया गया है कि इस तरल जैविक खाद को बनाने, बाजार में उपलब्ध खाद से तुलना करने में, फसलों पर इसके इस्तेमाल व प्रभाव को देखने में लगभग 1 साल का समय लग गया।
बालों में होते हैं पौधों के लिए सभी जरूरी तत्व : स्कूल शिक्षक व शोधकर्ता
शोधकर्ता व स्कूल के शिक्षक पशुपति मंडल ने कहा कि हमने बिना मिट्टी के पेड़ लगाने की सोच के साथ इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। इसके लिए बाजारों में बिक्री के बाद फेंक दी गयी सब्जियों को भी सड़ा कर खाद बनाया मगर यह कुछ खास कारगर नहीं साबित हुआ। पौधे ज्यादा दिनों तक ठीक नहीं पा रहे थे और ना ही उनका ग्रोथ हो रहा था। हमने पाया कि पौधों के अच्छे ग्रोथ के लिए जो कुछ अवयवों की जरूरत है वह सब कैरोटीन व प्रोटीन जातीय चीजों में ही मिलती हैं अतः हमने मनुष्य के बाल को ही इसका अच्छा स्त्रोत मानकर काम करना शुरू किया। मनुष्य के बालों में प्रोटीन के साथ ही पोटैशियम, मैग्नेशियम, नाइट्रोजन जैसे कई जरूरी अवयव मौजूद होते हैं। छात्रों की मदद से हमें इसमें सफलता भी मिली। उन्होंने बताया कि अपनी ओर से सारे परीक्षण करने के बाद इस प्रोजेक्ट को पहले हमने जिला स्तर पर सामने रखा जिसे फिर राज्यस्तर पर चुना गया और आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर 600 स्कूलों की प्रोजेक्ट प्रदर्शनी में भी हमारे इस प्रोजेक्ट को काफी प्रशंसा व प्रोत्साहन ​मिला। गुजरात के अहमदाबाद में 27 से 31 जनवरी तक यह प्रदर्शनी आयोजित हुई थी। शिक्षक पशुपति मंडल इस सफलता को बड़े पैमाने पर जनता के सामने लाना चाहते हैं। इसके लिए वे सरकार या किसी संस्था से आर्थिक मदद चाहते हैं। उनका कहना है कि छात्रों ने सच में कमाल कर दिया है। यह देशभर के किसानों को उपलब्ध हो यही हमारी कोशिश रहेगी। वहीं स्कूल के हेडमास्टर नरेन बक्सी ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे स्कूल के छात्रों ने यह कर दिखाया है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि छात्रों व शिक्षकों के इस खाद के लिए हमें जरूर सरकारी मदद मिलेगी। इस शोध में सक्रिय छात्र अर्पण मंडल ने कहा कि भविष्य में अगर हमें सरकारी मदद मिलती है तो हम किसानों को घर-घर इस खाद को पहुंचा सकेंगे। यह खाद किसी भी रासायनिक खाद की तुलना में बहुत प्रभावी है।
क्या प्रक्रिया है खाद बनाने की
प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता व शिक्षक पशुपति मंडल ने बताया कि 1.2 ग्राम बालों से दो लीटर ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर मिलता है। इसके लिए 1.2 ग्राम बालों को 1 घंटे के लिए नाइट्रिक एसिड में भिगोकर रखना होता है। इस जल के साथ बाद में एक निश्चित अनुपात में हाइड्रोजन पेरोक्साइड मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रण में सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ 2 लीटर पानी मिला देने से पौधों के लिए 1 : 50 के अनुपात का तरल जैविक खाद तैयार हो जाता है। इसकी लागत 80-100 रुपए पड़ती है जो कि बाजार में उपलब्ध अन्य खाद से कम है। उन्होंने कहा ​कि इस शोध के लिए 16 से 35 उम्र के लोगों के बालों को ही इस्तेमाल में लाया गया है जिसमें किसी तरह के कलर और रासायकिन चीजें इस्तेमाल नहीं की गयी थीं।

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