ट्रायल में फंसी रवींद्र सरोवर में रोइंग, जर्मनी से लायी गयी मशीन

रोइंग क्लब चाहते हैं पेट्रोल चालित बोट जबकि केएमडीए लायेगा बैटरी चालित
अब तक हो चुके हैं 3 ट्रायल मगर आवश्यक स्पीड में नहीं पहुंच पा रहे बोट
किस बोट को 900 मीटर की दूरी तय करने में कितना लगेगा समय
मैनुअल बोट में समय : लगभग 10 मिनट
बैटरी चालित बोट में समय : 5-6 मिनट
पेट्रोल चालित बोट में समय : लगभग डेढ़ मिनट
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : रवींद्र सरोवर में रोइंग हादसे में 2 रोअर्स की मौत के बाद गत मई महीने से रोइंग बंद है। इस बीच, रोइंग पुनः‍ चालू करने के लिए हाल में रोइंग क्लब प्रबंधनों, केएमडीए और कोलकाता पुलिस के बीच बैठक के बाद एसओपी जारी की गयी थी। एसओपी में रेस्क्यू बोट रखने समेत अन्य कई बातें कहीं गयी हैं। ऐसे में रेस्क्यू बोट के ट्रायल में ही रवींद्र सरोवर में रोइंग की पुनः शुरुआत फंसी हुई है। ट्रायल में कोई भी बैटरी ऑपरेटेड बोट आवश्यक स्पीड में लेक के एक किनारे से दूसरे किनारे तक नहीं पहुंच पा रही है जिस कारण अब जर्मनी से मशीन लाकर एक बार फिर ट्रायल कराने की बात कही गयी है।
अगले 2-3 दिनों में फिर होगा ट्रायल
केएमडीए के एक अधिकारी ने बताया कि अगले 2-3 दिनों में पुनः ट्रायल किया जायेगा। बताया गया कि जर्मनी से लायी गयी बैटरी ऑपरेटेड मशीन से भी एक बार ट्रायल किया गया था, लेकिन इस दौरान नेविगेशन में समस्या देखी गयी। ऐसे में पुनः मशीन के डिफेक्टिव पार्ट को ठीक करने हेतु जर्मनी भेजा गया है जिसके आने के बाद पुनः ट्रायल किया जायेगा। यहां उल्लेखनीय है कि अब तक रवींद्र सरोवर में 3 ट्रायल किये जा चुके हैं, लेकिन रेस्क्यू बोट आवश्यक स्पीड और तय समय सीमा में एक किनारे से दूसरे किनारे तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इतना लगना चाहिये समय
केएमडीए के अधिकारी ऐसा बैटरी ऑपरेटेड स्पीड बोट चाहते हैं जो लेक के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाने में 1 से डेढ़ मिनट का अधिकतम समय लगाये। वहीं अब तक जो 3 ट्रायल किये गये हैं, उनमें सभी बोट 4 से 5 मिनट का समय लगा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि संभवतः जर्मनी से आयी बैटरी ऑपरेटेड मशीन से ऐसा संभव हो सकेगा क्योंकि इसका पहली बार जब ट्रायल हुआ था तो लेक के एक किनारे से आईलैंड तक पहुंचने में केवल 30 से 35 सेकेंड ही लगे थे।
क्लब प्रबंधन चाहते हैं पेट्रोल चालित बोट
वेस्ट बंगाल रोइंग एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राजा दासगुप्ता ने सन्मार्ग से कहा, ‘एक रेस्क्यू बोट के ट्रायल के कारण लगभग 2 महीने से क्लब में रोइंग बंद है जिसका खामियाजा रोअर्स को भुगतना पड़ रहा है। बैटरी चालित स्पीड बोट उतनी तेज गति से एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा सकेगा जितनी तेज गति से पेट्रोल चालित बोट जा सकेगा। इसके अलावा बैटरी चालित बोट के बैटरी की साइज इतनी बड़ी है कि बैटरी रखने के बाद उसमें रेस्क्यू इक्विपमेंट या फिर रेस्क्यूअर में से कोई एक ही आ सकेगा।’ इसी तरह कलकत्ता राेइंग क्लब के सचिव देबू दत्ता ने कहा, ‘अधिकतम 20-25 दिनों में हम रोइंग पुन‍ः चालू कराना चाहते हैं। पेट्रोल चालित बोट से ही सबसे कम समय में रेस्क्यू हो सकेगा, लेकिन इसके लिए केएमडीए और एनजीटी के ग्रीन सिग्नल का इंतजार है। इस बीच हम पेट्रोल चालित बोट वालों से बात कर रहे हैं।’

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