दुर्गापूजा को यूनेस्को से मान्यता दिलाने में केंद्र सरकार की भूमिका : मीनाक्षी लेखी

राज्य छीन रहा है श्रेय
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दुर्गापूजा को यूनेस्को से अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिलने के बाद पूरे राज्य में उत्साह का माहौल है, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि को दिलवाने में राज्य और केंद्र के बीच रस्साकशी जारी है। एक तरफ जहां राज्य सकार यह दावा करती आ रही है कि यूनेस्को से मिली मान्यता में उसकी भूमिका अहम है, तो वहीं केंद्र तृणमूल कांग्रेस के दावों को सिरे से नकारते हुए राज्य सरकार पर श्रेय छीनने का आरोप लगा रही है। यूनेस्को को धन्यावाद देने के लिए 1 सितंबर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी से रेड रोड तक कार्निवल रैली निकाली गई थी, तो वहीं केंद्र सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा शनिवार को इस मान्याता मिलने के एवज में भारतीय संग्राहलय में एक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में संस्कृति और विदेश मंत्रालय की राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि यूनेस्को में सचिव के पद पर जो व्यक्ति आसीन होता है वह देश का प्रतिनिधित्व करता है ना कि किसी राज्य का। यूनेस्को से मिली मान्यता सभी देशवासियों के लिए गौरव का विषय है। विशेषकर गैर बांग्लाभाषी लोगों के लिए जो मातृ शक्ति की आराधना करते हैं। राज्य सरकार द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि का श्रेय छीनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वसुधैव कुटुम्बकम की विचारधारा का पालन करती है और अपना पराया की सोच को नहीं मानती। जो इस तरह की बातें करते हैं उनकी सोच संकीर्ण होती है। केंद्रीय राज्य शिक्षा मंत्री सुभाष सरकार ने कहा कि यूनेस्को से मान्यता मिले इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय नोडल संस्थान के तौर पर कार्य करता है। डोजियर बनाने का काम सांस्कृतिक मंत्रालय करता है और यूनेस्को के सभी सदस्य देशों में समर्थन मांगने का कार्य विदेश मंत्रालय करता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कहीं भी राज्य सरकार या उसके मंत्रियों की भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश के इतने बड़े त्योहार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने पर हो रही राजनीति गलत है। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि भारत सरकार लंबे समय से दुर्गापूजा को यूनेस्को से मान्यता दिलवाने में प्रयासरत थी। साल 2012 में भी सरकार ने दुर्गापूजा के उत्सव को नामंकन के लिए डोजियर भेजा था, हालांकि तब चयन नहीं हो पाया था। इसके बाद साल 2018 में संगीत कला अकादमी को इस कार्य में सक्रिय किया गया। संस्थान को पांच लाख रुपये भी दिए गए, जिसके बाद साल 2019 की नामांकन प्रक्रिया में दोबारा दुर्गापूजा के उत्सव को भेजा गया। साल 2020 में यूनेस्को ने दो बिंदुओं पर शंका व्यक्त करते हुए सीमित समय सीमा में जवाब मांगे थे, जिसके जवाब फौरन यूनेस्को को भेज दिया गया, तब जाकर दुर्गापूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिला।

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