ग्रीन पटाखों की पहचान में ‘क्यूआर कोड’ बना सिरदर्द

नकली क्यूआर कोड लगाकर पटाखे बेचने का आरोप
पटाखा व्यवसायियों से लेकर प्रशासन तक के लिए पहचानना मुश्किल
सोनू ओझा
कोलकाता : दिवाली के मौके पर ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति तो मिल गयी है लेकिन ग्रीन पटाखे का मापदंड क्या है इसे लेकर अब तक लोगों का कन्फ्यूजन दूर नहीं हुआ है। कोलकाता में तीन जगहों पर पटाखों का बाजार भी सजा है मगर वहां कुछ ऐसे भी पटाखे बेचने वाले दुकानदार हैं जो ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य अवैध पटाखे बेच रहे हैं। इसे लेकर पटाखा व्यवसायी से लेकर प्रशासन तक की भौंहें तन गयी हैं। घरों तक अवैध पटाखे न जाएं इसके लिए पुलिस की तरफ से लगातार अभियान चल रहा है, अवैध पटाखे जब्त किये जा रहे हैं, वहीं पटाखा बाजार में भी कोशिश की जा रही है कि कोई भी पटाखा बेचने वाला अपनी स्वार्थपूर्ति के चक्कर में अवैध पटाखे न बेचे।
तीनों पटाखा बाजार में लगातार हो रही माइकिंंग
कोलकाता में तीन जगहों पर पटाखा बाजार सजा है। टाला में 44 स्टॉल, बेहला में करीब 14 स्टॉल तथा कालिकापुर में करीब 11 स्टॉल हैं जहां पटाखों की बिक्री की जा रही है। बेहला में लगे पटाखा बाजार के ऑर्गनाइजर अमिताभ भट्टाचार्य ने बताया कि हर पटाखे में क्यूआर कोड तथा लोगो लगाया गया है। दिक्कत यहां आ रही है कि कई पटाखों के पैकेट में लगा क्यूआर कोड एरर दिखा रहा है जिसकी वजह से उसे ग्रीन पटाखों की श्रेणी से बाहर कर दिया जा रहा है। ऐसे पटाखे बेचने वालों को हमारी तरफ से भी बाजार में पटाखा बेचने की इजाजत नहीं दी जा रही है। हमारी ओर से सख्ती से कहा जा रहा है कि ग्रीन पटाखों के मापदंड को मानने वाले व्यवसायी ही बाजार में पटाखा बेच सकेंगे।
क्यूआर कोड बना सिरदर्द
आखिर कैसे की जाएगी ग्रीन पटाखों की पहचान, इसके लिए आम पटाखे और ग्रीन पटाखों में अंतर समझ पाना सबके लिए संभव नहीं हो पाता है इसलिए ग्रीन पटाखों के बॉक्स में अलग तरीके का क्यूआर कोड लगाया जाता है। इस क्यूआर कोड के लिए एक ऐप है। इस क्यूआर कोड से पता चलता है कि अमुक पटाखा ईको फ्रेंडली है कि नहीं। इन पटाखों के बॉक्स में पेसो और नेरो लोगो भी लगा होता है जो सहायक होता है ग्र्रीन पटाखों की पहचान कराने में। आरोप लग रहे हैं कि कुछ व्यवसायी अवैध पटाखों में नकली बार कोड का इस्तेमाल कर रहे हैं, पुलिस की नजर में जो आ रहा है उसे जब्त कर लिया जा रहा है जो नहीं पकड़ में आ रहा है वे धड़ल्ले से ग्रीन पटाखे की आड़ में अवैध पटाखे बेच रहे हैं।
असली-नकली का फर्क कैसे पहचानें
पेसो और नेरो द्वारा दिये गये लोगो के साथ क्यूआर कोड ग्रीन पटाखों में लगे होते हैं। इसके लिए एक ऐप है जो क्यॅूआर कोड को स्कैन करता है। दिक्कत यहां यह है कि ग्रीन पटाखों में लगे क्यूआर कोड ऐसे भी हैं जो गूगल में स्कैन हो जा रहा है लेकिन पेसो और नेरो के एनओसी​ से तैयार ऐप में स्कैन नहीं हो रहे हैं जिन्हें अवैध घोषित कर दिया जा रहा है। अब पटाखा व्यवसायियों का आरोप है कि सभी ग्रीन पटाखे हैं जिन्हें शिवकाशी से मंगवाया गया है, अब क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो रहा है तो इसमें कोई क्या कर सकता है।
क्या होता है ग्रीन पटाखा
* ग्रीन पटाखों में एल्यूमीनियम, बोरियम, पोटैशियम, कार्बन आदि का इस्तेमाल नहीं होता है, जिनका असर सीधे फिजा में पड़ता है।
* सामान्य पटाखों को जलाने पर नाइट्रोजन और सल्फर गैस भारी मात्रा में निकलती है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक हैं। वहीं ग्रीन पटाखों में 40 से 50 फीसदी तक ये दोनों ही गैस कम निकलती है।
* ग्रीन पटाखों पर ग्रीन स्टिकर और बारकोड लगाया जाता है जो इस बात की पुष्टि करता है कि ये ग्रीन पटाखे हैं। बारकोड से पटाखे की समस्त जानकारी भी सुलभ होती है।
* ग्रीन पटाखों में धुआं, रोशनी और आवाज सामान्य पटाखों की तुलना में काफी कम होती है।
* कई ग्रीन पटाखों में हल्की खुशबू भी होती है।

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