जनहित या राजनीतिक स्वार्थ ? तृणमूल ने उठाया प्रश्न

तृणमूल का तर्क – एक ही पार्टी के नेताओं के नाम क्यों ?
अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की संपत्तियों की जांच क्यों नहीं
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के 23 नेताओं के पास आय के स्रोत से अधिक संपत्ति होने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है। इस पर तृणमूल ने प्रश्न उठाया है कि इसके पीछे कोई और राजनीतिक हित है? क्या यह जनहित में है कि ईडी को नेताओं और मंत्रियों की संपत्ति की जांच करने के लिए कहा गया है? तृणमूल का तर्क है, नहीं तो सूची में एक ही पार्टी के नेताओं और मंत्रियों के नाम क्यों हैं? ईडी को देश के बाकी राजनीतिक दलों के नेताओं की संपत्तियों की जांच करनी चाहिए। तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि जो जो लोग ये काम कर रहे हैं, उन्हें यह सोचने की जरूरत है कि क्या इसे व्यापक रूप देने की जरूरत है या चीजों को चुनिंदा तरीके से करने की जरूरत है। 2011 और 2016 के हलफनामे के अनुसार यह केवल एक पार्टी के खिलाफ क्यों है? सभी राजनीतिक दलों के खिलाफ हो, चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी हो। तभी तो समझ आयेगा कि जनहित में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ विशेष कोई राजनीतिक स्वार्थ जुड़ा हुआ है। हमें ऐसा लगता है कि इसे विशेष महत्व देने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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