महानगर में पूजा पंडालों की थीम का पता लगाने के लिए पुलिस अपना रही है ‘खुफियागिरी’

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सहित महानगर में दुर्गा पूजा पंडालों की थीम का मतलब ही सरप्राइज होता है। पूजा पंडाल की थीम के बारे में पहले से पता होने के कारण वहां होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को सहूलियत होती है। पुलिस थीम के अनुसार वहां पर क्राउड सर्कुलेशन को लेकर प्लान तैयार करती है। लालबाजार के अधिकारी ने बताया कि पहले से पूजा पंडाल की थीम जानना पुलिस के लिए आसान काम नहीं है, क्योंकि कई पूजा आयोजक अपनी थीम के बारे में जानकारी नहीं देना चाहते हैं। ऐसे में पुलिस को खुफियागिरी की मदद से विभिन्न पूजा पंडालों की थीम के बारे में पता लगाना पड़ता है। पुलिस के अनुसार दुर्गा पूजा के समय क्राउड सर्कुलेशन बहुत ही मत्वपूर्ण है। आम तौर पर महानगर के किस पंडाल में कितने दर्शकों की भीड़ होती है, इसके बारे में लालबाजार के पास जानकारी रहती है। हालांकि पुलिस के लिए बड़े पूजा पंडालों की थीम की जानकारी जरूरी होती है क्योंकि बड़े पूजा पंडालों में थीम के अनुसार लोगों की भीड़ उमड़ती है। कुछ साल पहले देखा गया था कि देशप्रिय पार्क पंडाल में सबसे बड़ी प्रतिमा देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ को देखते हुए पूजा पंडाल को दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया गया था। पिछले साल श्रीभूमि में बुर्ज खलीफा की थीम पर तैयार पूजा पंडाल में उमड़ी लोगों की भीड़ के कारण पंडाल को लोगों के लिए बंद कर दिया गया था। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पहले से थीम पता होने के कारण किसी पूजा पंडाल में पिछले साल की तुलना में भीड़ बढ़ेगी या घटेगी, इसका अनुमान लगाने में आसानी होता है। इसके अनुसार विशेष पूजा पंडालों के आसपास पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाने को लेकर निर्णय लिया जाता है। ट्रैफिक पुलिस भी इलाके में वाहनों के यातायात को स्वाभाविक रखने के लिए उसी अनुसार प्लानिंग करती है। इसके साथ ही किस रास्ते से दर्शनार्थी मंडप में प्रवेश करते हैं और किसी रास्ते से बाहर निकलेंगे, इस क्राउड सर्कुलेशन की तैयारी पुलिस की ओर से की जाती है, इसलिए लालबाजार की तरफ से स्थानीय थानों को उनके इलाके के पूजा पंडालों की थीम के बारे में पता लगाने के लिए कहा गया है। लालबाजार के एक अधिकारी ने बताया कि संभवत: सरप्राइज देने के लिए अधिकतर पूजा आयोजक थीम के बारे में जानकारी नहीं देते हैं। कई मामलों में खुफियागिरी की मदद से थीम के बारे में पता लगाया जाता है। लोकल पुलिस स्टेशन को क्लब के सदस्यों से बातचीत कर थीम के बारे में पता लगाने के ‌लिए कहा गया है। उसके अनुसार पंडाल में कितनी भीड़ हो सकती है, इसका अनुमान लालबाजार के अधिकारी लगाते हैं। इधर, फोरम फॉर दुर्गोत्सव के महासचिव शास्वत बसु ने बताया कि आम तौर पर पूजा आयोजक 10 से 15 दिन पहले अपनी थीम के बारे में जानकारी देते हैं। उससे पहले कई अपनी थीम की जानकारी बाहर नहीं देना चाहते हैं। सब समय थीम के कारण भीड़ होती है ऐसा नहीं है। उत्तर और दक्षिण कोलकाता में कई पूजा आयोजक बिना थीम की पूजा करते हैं लेकिन वहां पर भीड़ काफी होती है। पुलिस के अनुसार दो साल बाद कोरोना संक्रमण घटने और कोरोना नियमों में बदलाव के कारण इस साल पूजा पंडालों में लोगों की भीड़ उमड़ सकती है। इस महीने के अंत में शहर के सभी पुलिस स्टेशन के अधिकारी उनके क्षेत्र के पूजा आयोजकों के साथ बैठक करेंगे। पुलिस अधिकारी पूजा आयोजकों की सुविधा और असुविधा की बात सुनने के बाद उसके समाधान की कोशिश करेंगे। इसके बाद डिविजनल डीसी और पुलिस कमिश्नर भी पूजा आयोजकों के साथ बैठक करेंगे।

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