हुक्का बार के कारोबार में पुलिस का कोई दखल नहीं : हाई कोर्ट

कहा : ‘मेयर या किसी के कहने भर से रेड नहीं कर सकते’
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता और विधाननगर में चल रहे हुक्का बार के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। इस बाबत दायर एक रिट पर मंगलवार को सुनवायी करने के बाद हाई कोर्ट के जस्टिस राजाशेखर मंथा ने यह आदेश दिया। केएमसी के इस जवाब पर कि मेयर ने कहा था, जस्टिस मंथा ने कहा कि किसी के कहने भर से पुलिस रेड नहीं कर सकती है। क्या राज्य सरकार ने इस बाबत कोई कानून बनाया है।
नेशनल रेस्टुरेंट ऑफ इंडिया और अन्य ने हाई कोर्ट में यह रिट दायर की थी। जस्टिस मंथा ने इस मामले में कोलकाता और विधाननगर के पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था। कोलकाता के सीपी की रिपोर्ट को देख कर जस्टिस मंथा ने कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट है। इस मामले में एडवोकेट जयदीप कॉर ने पिटिशनरों की तरफ से बहस करते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला दिया। यह सीओपीटी एक्ट के तहत आता है और सुप्रीम कोर्ट ने हुक्का बार को वैध ठहाराया है। जस्टिस मंथा ने कहा कि हुक्का बार रेस्टुरेंट का एक हिस्सा होता जहां करीब 40 लोग हुक्का पी सकते हैं। अगर राज्य सरकार इस पर रोक लगाना चाहती है तो उसे इस बाबत अलग से कानून बनाना पड़ेगा। जस्टिस मंथा ने सवाल किया कि क्या राज्य सरकार ने कोई कानून बनाया है। विधाननगर की तरफ से कहा गया कि हुक्का बार वालों ने कोई लाइसेंस नहीं लिया है। एडवोकेट कॉर ने कहा कि इसके लिए अलग से कोई लाइसेंस नहीं लेना पड़ता है। इसके साथ ही टिप्पणी की कि अगर इसे माने तो हर सिगरेट पीने वाले को ट्रेेड लाइसेंस लेना पड़ेगा। जस्टिस मंथा ने कहा कि राज्य सरकार का कोई कानून नहीं है लिहाज हुक्का बार पर कोई रोक नहीं लगायी जा सकती है।

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