पार्थ के वकील ने दी दलील 28 दवाएं खाते हैं पार्थ, जमानत दी जाए

सीबीआई ने कहा – 400 से अधिक अयोग्य लोगों की गैरकानूनी तरीके से की गयी नियुक्ति
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अलीपुर कोर्ट से पार्थ चटर्जी को सीबीआई हिरासत में 21 सिंतबर तक के लिए भेज दिया गया है। कोर्ट में पार्थ चटर्जी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पहले से ही जेल हिरासत में हैं। अब सीबीआई की टीम उन्हें अलग से गिरफ्तार कर हिरासत में लेना क्यों चाहती है। इसके बाद सीबीआई की टीम ने बताया कि उनके साथ ही 5 अभियुक्तों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं, इनमें से तीन को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इस कांड में पार्थ चटर्जी की भूमिका सबसे बड़ी और अहम है। इस बारे में उनके वकील ने कहा कि जब भी उन्हें बुलाया गया, वे गये और सीबीआई की जांच में मदद की। अब क्यों उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। सीबीआई की टीम ने कहा कि 400 से अधिक अयोग्य लोगों को गैरकानूनी तरीके से शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया था।
रामकृष्ण मिशन का छात्र हूं, एमबीए, डाॅक्टरेट, उच्च शि​​क्षित परिवार से आता हूं
जमानत अर्जी के दौरान पार्थ ने कहा कि वह रामकृष्ण मिशन के छात्र हैं। उन्होंने एमबीए किया है, डाक्टरेट की पढ़ाई की है। उनका बैकग्राउंड अच्छा है। वे एक उच्च शिक्षित परिवार से आते हैं। समाज के प्रति उनका एक दायित्व है। 28 दवाएं खाता हूं। मैं बेहद अस्वस्थ हूं। जमानत दी जाए। सीबीआई की टीम ने कहा कि इस पूरे भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए पार्थ और कल्याणमय गांगुली को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की जरूरत है। इनकी सिफारिश पर कई ऐसे लोगों की नौकरी हुई है जो अयोग्य थे। इसलिए दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की जरूरत है।
मेरे हस्ताक्षर जाली हैं – कल्याणमय ने कहा
वकील के जरिए कल्याणमय ने कहा कि मैंने 2018 के बाद से किसी नियुक्ति पत्र पर दस्तखत नहीं किए हैं। मेरे हस्ताक्षर जाली हैं। वहीं से इसका इस्तेमाल किया गया। कल्याण ने यह भी कहा, “मैंने कभी कोई भर्ती परीक्षा नहीं दी है। मैंने इंटरव्यू भी नहीं लिया। एसएससी मध्य शिक्षा परिषद को सिफारिशें भेजता था। दोनों पक्षों से सवाल-जवाब के अंत में पार्थ खुद उठ खड़े हुए और फिर से जमानत मांगी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पार्थ की जमानत आखिरकार खारिज हो गई। न्यायाधीश ने दोनों को 21 सितंबर तक सीबीआई हिरासत में रखने का आदेश दिया।

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