पंचायत चुनाव : कुछ नेताओं की ‘सक्रियता’ पर तेज हुई राजनीति

खुद की काबिलियत साबित करने की कवायद शुरू की
भाई फोंटा पर 6 साल बाद ममता से मिलने पहुंचे
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में आगामी चुनाव पंचायत होने जा रहा है, त्योहारों का मौसम भी​ लगभग खत्म हो गया है। अब राजनीतिक दलों की प्राथमिकता पंचायती इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ाने की है जिसकी तैयारियां भी सभी दलों ने शुरू कर दी है। 2018 में पंचायत में पहले पायदान पर तृणमूल थी, इस साल भी यह स्थान बना रहे उसके लिए गांव की आबादी के करीब जाकर जमीनी स्तर पर तृणमूल अपनी जड़ों को मजबूत करने में लग गयी है जिसकी रणनीति पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी तैयार कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो पंचायत चुनाव के लिए जिलास्तर पर विशेष टीम तैयार की जाएगी जो बारीकी से पंचायत स्तर पर कार्य करेगी। यह तो बात हुई पार्टी स्तर की, इस बीच मुकुल रॉय व शोभन चटर्जी जैसे नेताओं की सक्रियता अचानक बढ़ गयी है जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गयी हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इस बारे में कुछ खुल कर नहीं कहा गया है। समझा जा रहा है कि पंचायत चुनाव में किसका नाम होगा, किसका कटेगा, किस नेता विशेष के कंधों पर नेतृत्व होगा इसका फैसला अगर किसी का होगा तो अभिषेक बनर्जी का होगा।
2018 से 2022 में पार्टी का समीकरण बहुत बदला
2018 से 2022 तक तृणमूल की सक्रियता काफी बढ़ी है। इस बीच पार्टी ने 2019 का आम चुनाव और 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ा जिसमें प्रदर्शन बेहतर होने के साथ ही साथ पार्टी स्तर में कई बड़े बदलाव भी हुए। पार्टी के एक नेता ने बताया कि तब से अब में कई बदलाव हुए। पार्टी में युवाओं को जिम्मेदारी दी गयी तो पुराने नेताओं को दूसरी जिम्मेदारी दी गयी।
2018 में तृणमूल का रिपोर्ट कार्ड ऐसा था
जिला परिषद : 95 %
पंचायत समिति : 90 %
ग्राम पंचायत : 73 %

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