कभी साथ थे दो दोस्त, आज चुनावी दंगल में हैं आमने-सामने

विधाननगर वार्ड 31 में होगा दिलचस्प मुकाबला
एक-दूसरे को पटखनी देने को तैयार हैं सव्यसाची और देवाशिष जाना
सोनू ओझा
कोलकाता/विधाननगर : जय और वीरू की दोस्ती के चर्चे हर जगह होते हैं। कहने को तो दोनों फिल्म ‘शोले’ के किरदार हैं मगर इनकी दोस्ती की मिसालें दी जाती हैं। खासकर फिल्म का गाना ‘ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे’… साथ जीने-मरने की कसमे तक खायी गयीं जिसके लिए गाने के बोल ‘तेरी जीत मेरी जीत, तेरी हार मेरी हार’ सभी की जुबां पर रहता है। यह गाना साल्टलेक के विधाननगर नगर निगम के एक वार्ड में हूबहू चरितार्थ हो रहा है। यह वाकया है कद्दावर नेता और विधाननगर के मेयर रह चुके सव्यसाची दत्ता का वार्ड नंबर 31 का, जो इस बार के चुनावी अखाड़े का दिलचस्प वार्ड बन चुका है। यहां सव्यसाची और उनके दाेस्त देवाशिष जाना के बीच चुनावी दंगल है। यहां तृणमूल की ओर से सव्यसाची दत्ता हैं तो भाजपा ने देवाशिष जाना पर दांव लगाया है। खास बात यह है कि दोनों अपनी दोस्ती के लिए जाने जाते हैं जो आज चुनावी दंगल में आमने-सामने हैं। अब जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है यह तो 22 जनवरी को ही पता चलेगा।
दोस्ती तगड़ी थी, साथ काम करते थे दोनों
सव्यसाची और देवाशिष के लिए इतना कहना ही काफी है कि दोनों की दोस्ती आज की नहीं है। सव्यसाची जब विधाननगर के मेयर थे जब देवाशिष जाना मेयर परिषद के सदस्य थे। दोनों साथ काम करते थे, दोस्ती ऐसी थी कि दोनों एक साथ ही तृणमूल से नाराज हुए और पार्टी छोड़ भाजपा के खेमे में चले गये। हालांकि कुछ दिनों बाद सव्यसाची का मोहभंग हो गया और उन्होंने घर वापसी कर तृणमूल में लौट आए।
सव्यसाची ने कहा, भालो बंधु बाजे दले
चुनावी मुकाबले को लेकर तृणमूल उम्मीदवार सव्यसाची दत्ता ने कहा कि देवाशिष आज भी मेरा अच्छा दोस्त है, उसके लिए इतना ही कहूंगा कि भालो बंधु, बाजे दले यानी दोस्त अच्छा है लेकिन पार्टी खराब है। वहीं अपनी जीत पर भरोसा दिखाते हुए सव्यसाची बोले कि जीत मेरे नाम पर नहीं ममता बनर्जी की तस्वीर के कारण होगी।
देवाशिष ने कहा, यहां दोस्त है दंगल में दुश्मन
देवाशिष जाना भी अपनी दोस्ती को लेकर आज भी दम भरते हैं। उन्होंने कहा ​कि चुनाव में हम दोनों दुश्मन हैं, इसका मतलब यह नहीं कि कहीं मिलने पर हम बात नहीं करते, हम दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं। रही बात जीत या हार की तो जनता जानती है कि मैं कैसा जनप्रतिनिधि रहा हूं। मुझे काम दिखाने के लिए सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं है।
एक नजर वार्ड 31 पर
इस वार्ड की दिलचस्प बात यह है कि जिस समय विधानगर पालिका थी उस वक्त इस वार्ड का एक हिस्सा पालिका का वार्ड नंबर 8 था जिसमें 10 सालों तक देवाशिष जाना पार्षद रहे थे। आज भी देवाशिष जाना इस वार्ड के स्थानीय निवासी हैं जबकि सव्यसाची के लिए कहा जाता है कि वे इस वार्ड के नहीं हैं। समस्या की बात करें तो पानी, सफाई यहां की मुख्य समस्याओं में आती है।

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