जेयू में आर्थिक तंगी पर ब्रात्य ने कहा, पूर्व छात्रों से मदद मांगना रिवाज रहा है

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और विश्वविद्यालय की तरफ से पूर्व छात्रों से मदद मांगी गयी है। यहां तक कि इस संबंध में राज्य सरकार को भी पत्र दिया गया है। हालांकि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय के साथ कुछ नया नहीं हो रहा है। इससे पहले की सरकार से भी जेयू ने फंड की मांग की थी। पूर्व छात्रों से मदद लेना भी रिवाज रहा है। विदेशों में भी ऐसा होता है। गुरुवार को विकास भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशों में ऐसा होता है। ऑक्सफोर्ड में ऐसा रिवाज है। इसका मतलब यह नहीं कि आर्थिक तंगी है। विश्वविद्यालय के पास पैसे नहीं हैं, यह तो प्रमाण नहीं करता है। राज्य सरकार से भी सभी विश्वविद्यालय रुपयों की मांग करते हैं। साथ ही जिस विद्यालय व विश्वविद्यालय में एक समय पढ़ाई की उन्हें अपने शिक्षण संस्थानों के प्रति एक दायित्वबद्धता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी मदद नहीं कर रही है। कई करोड़ रुपये अभी भी बाकी हैं।
आरबीयू मामले में शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह से विश्वविद्यालय का मामला है। हो सकता है कि कोई घर का चाय पीना पसंद करते हैं। उल्लेखनीय है कि वीसी ने यह शिकायत की थी कि विश्वविद्यालय में कोई चाय व पानी देने वाला भी नहीं है। स्टाफ की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट की राय पर टिकी हैं निगाहें
कई ऐसे प्रार्थी हैं जिनकी उम्र 40 से पार हो चुकी है। ऐसे में क्या वे आवेदन कर सकते हैं, इस बारे में शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र का यह नियम है। राजस्थान सरकार का एक फैसला आया है। उसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामला होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट जो राय देगा उसे माना जायेगा।

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