स्ट्रेचर ट्रॉली की कमी से जूझ रहा है एनआरएस हॉस्पिटल

मधुर चतुर्वेदी
कोलकाता : महानगर में चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों की सूची में शामिल नीलरतन सरकार मेडिकल कालेज और अस्पताल, स्ट्रेचर ट्रॉली की कमी का सामना कर रहा है। वर्तमान में अस्पताल में कुल 150 स्ट्रेचर ट्रॉली हैं। हालांकि, इनमें से भी कई खस्ता हालत में हैं। जंग लगी दशकों पुरानी इन स्ट्रेचर ट्रॉली में मरीज को लिटा कर अस्पताल के वार्ड में पहुंचाना भी अपने आप में एक जंग के समान है। एनआरएस अस्पताल में जहां केवल कोलकाता से ही नहीं बल्कि राज्य भर से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं वहां स्वास्थ्य सेवा के मौलिक उपकरण की किल्लत होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि कोलकाता एवं संलग्न इलाकों में गंभीर दुर्घटना के अधिकांश मरीजों को एनआरएस अस्पताल ही लाया जाता है। स्ट्रेचर ट्रॉली का सबसे ज्यादा इस्तेमाल इमरजेंसी और आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में होता है। एनआरएस अस्पताल जहां रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं वहां स्ट्रेचर ट्रॉली उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के परिवार द्वारा अस्पताल के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए जाने की घटना आए दिन सामने आते रहती है।
‘स्ट्रेचर की किल्लत की मुख्य वजह, फंड की कमी’
नीलरतन सरकार मेडिकल कालेज और अस्पताल की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अस्पताल में रोजाना औसतन 6,000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से करीब 2,000 मामले इमरजेंसी और आउटडोर विभाग के होते हैं। इमरजेंसी में आए मरीजों को स्ट्रेचर प्रदान करना बाध्यता है। ऐसे में 100 स्ट्रेचर इमरजेंसी विभाग और 50 स्ट्रेचर ओपीडी विभाग में रखे जाते हैं। अधिकारी ने बताया कि कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मरीज के परिवार ने स्ट्रेचर लिया, हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद भी वह स्ट्रेचर तब तक वापस नहीं करते जब तक कि मरीज को रिलीज नहीं किया जाता। अधिकारी ने बताया कि स्ट्रेचर की किल्लत की मुख्य वजह फंड की कमी है। अस्पताल द्वारा स्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त संख्या में स्ट्रेचर प्रदान किए जाने को लेकर पत्र लिखा गया है। हालांकि, विभाग ने अब तक फंड आवंटित नहीं किया है।

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