पार्थ के खिलाफ पहली चार्जशीट में 43 गवाहों के नाम, संलग्न दस्तावेज 146,043 पृष्ठों में

48 करोड़ की अटैचमेंट में एफडी, फार्म हाउस जमीन के पेपर, फ्लैट आदि शामिल
पार्थ चटर्जी कर रहे थे अर्पिता की कंपनियों को कंट्रोल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पार्थ चट​र्जी अब एसएससी मामले में पूरी तरह फंस चुके हैं। सीबीआई की टीम इन दिनों पार्थ चटर्जी से लगातार पूछताछ कर रही है। वहीं दूसरी ओर सोमवार को ईडी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके व उनकी सहयोगी अर्पिता की 48 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली। एक ओर सीबीआई और दूसरी ओर ईडी, पार्थ चटर्जी का एसएससी मामले में बचना अब नामुमकिन सा होता जा रहा है। पहली चार्जशीट 172 पेज की है, इसमें उनके खिलाफ गवाही देने के लिए तैयार 43 लोगों के नाम हैं जो कि ये साबित कर सकते हैं कि उन्होंने इस मामले में धन लिये हैं और इस कांड में लिप्त हैं। ईडी के वकील अभिजीत भद्र ने कहा कि आरोपपत्र के साथ संलग्न दस्तावेज 146,043 पृष्ठों में हैं।
40 अचल संपत्ति तो 35 बैंक अकाउंट में डिपोजिट
ईडी ने पार्थ और उनकी करीबी अर्पिता के पास से 49.80 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे और 5.08 करोड़ की ज्वेलरी बरामद की थी। इसके अलावा उन्हें गत 23 जुलाई से 5 अगस्त तक हिरासत में रखकर टीचर भर्ती घोटाले में पूछताछ भी की थी। अब तक 103.10 करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है। इनमें 40 अचल संपत्ति तो 35 बैंक अकाउंट में जमा राशि को अटैच किया गया है। इसके अलावा कोलकाता व आसपास इलाके में 40.33 करोड़ की कीमत के फ्लैट, फार्म हाउस तथा 7.89 करोड़ रुपये की राशि जो कि 35 बैंक अकाउंट में थे उसे भी अटैच कर लिया गया है। एजेंसी का कहना है कि अटैच की गई संपत्ति और बैंक बैलेंस फर्जी कंपनियों के नाम पर थे लेकिन इसका मालिकाना हक पार्थ चटर्जी के पास था और सभी लोग पार्थ के कहने पर इन फर्जी कंपनियों को कंट्रोल कर रहे थे।
और क्या – क्या पता चला
40 अचल संपत्ति, 31 लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी तथा 201 शेल कंपनियों का पता चला है। ईडी की टीम अभी कई और संपत्तियों को स्कैनर में रखे हुए हैं जो कि पार्थ चटर्जी के रिश्तेदारों व अन्य सहयोगियों के नाम पर हैं। सभी दस्तावेजों को 4 ट्रंक में कोर्ट में पेश किया गया। ईडी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से 2021 के बीच भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी ने भ्रष्टाचार के जरिये ये रुपये लिए थे। वहीं इन फर्जी शेल कंपनियों में 5000 से लेकर 10000 के बीच रुपये की नौकरी पर गरीब व जरुरतमंद लोगों को डायरेक्टर आदि बनाया जाता था। ईडी सूत्रों की मानें तो बीरभूम तथा कई अन्य जिलों में उनके रिश्तेदारों की भी काफी संपत्तियां हैं जिनकी छानबीन की जा रही है। पार्थ चटर्जी की ओर से किसको कितना रुपया दिया गया था, इसका पता लगाया जा रहा है।

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