मानिक भट्टाचार्या की एसएलपी खारिज, वक्त गुजरेगा जेल में

ईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट के डिविजन बेंच का आदेश
सन्मार्ग संवाददाता
नयी दिल्ली/कोलकाता : प्राइमरी शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मानिक भट्टाचार्या की तरफ से दायर एसएलपी खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बसु और जस्टिस विक्रम नाथ के डिविजन बेंच ने वृहस्पतिवार को यह आदेश दिया। ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के विरोध में यह एसएलपी दायर की गई थी। मामले की सुनवायी के बाद डिविजन बेंच ने फैसले को आरक्षित कर लिया था।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि डिविजन बेंच ने ईडी द्वारा की गई मानिक भट्टाचार्या की गिरफ्तारी के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। मानिक भट्टाचार्या ने अपने एडवोकेट से मिलने की इजाजत मांगी तो डिविजन बेंच ने इसे भी खारिज कर दिया। डिविजन बेंच ने कहा कि इस बाबत उपयुक्त कोर्ट में एप्लिकेशन दाखिल करें। इस एसएलपी की सुनवायी 18 अक्टूबर को पूरी हो गई थी, लेकिन डिविजन बेंच ने फैसला आरक्षित कर लिया था। मानिक भट्टाचार्या की तरफ से दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सवाल उठाया था कि इसी डिविजन बेंच ने सीबीआई की तरफ से दायर मामले में मानिक भट्टाचार्या की गिरफ्तारी पर रोक लगायी थी। इसके बावजूद ईडी ने उन्हें टीचर नियुक्ति घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। ईडी की तरफ से बहस करते हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है और स्वाधीन तरीके से मामले की जांच करती है और मानिक भट्टाचार्या को पीएमएल एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है। इस मामले में आला दर्जे के अफसर और नेता शामिल हैं। पूर्व उद्योग मंत्री पार्थ चटजी और अर्पिता मुखर्जी के पास से करीब 50 करोड़ रुपए बरामद हुए थे। क्राइम की इस रकम में मानिक भट्टाचार्या की भागीदारी की जांच की जा रही है। इसके साथ ही मानिक भट्टाचार्या की बहुत सी बेनामी संपत्तियों की जानकारी मिली है। उनके लड़के के नाम भी बहुत सी संपत्तियों का खुलासा हुआ है। डिविजन बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ईडी की अपील पर भरोसा करते हुए एसएलपी को खारिज कर दिया।

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