बंगाल को अपना दूसरा घर मानते थे केशरीनाथ त्रिपाठी

ममता बांधती थीं उन्हें राखी, उत्सव में भिजवाती थी मिठाई
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी का रविवार को निधन हो गया। सुबह 5 बजे प्रयागराज स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। केशरीनाथ त्रिपाठी 2014 से 2019 के बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। उन्होंने बंगाल को हमेशा ही अपना दूसरा घर समझा। यूपी के होने बावजूद बंगाल की कला संस्कृति व यहां लोगों से केशरीनाथ त्रिपाठी का विशेष जुड़ाव रहा है। केशरी नाथ त्रिपाठी कई अहम पदों पर रहें, अहम जिम्मेदारियों को संभाला। लेखक और कवि केशरी नाथ त्रिपाठी ने कई किताबें भी लिखी। बंगाल में धार्मिक सेवा संस्थाओं से भी उनका काफी लगाव रहा है। वे यहां कई सेवा संस्थाओं के कार्यक्रमों में भी बढ़ चढ़कर अपनी रुचि दिखाते थे। यहीं वजह है कि उनकी कमी संस्थाओं को खलेगी।
सीएम बांधती थी राखी
सीएम ममता बनर्जी केशरीनाथ त्रिपाठी को अपना भाई कहती थीं। हर साल उन्हें राखी भी बांधती थीं। विभिन्न उत्सवों में सीएम ने मिठाई भी भेजती थीं।
कई अहम जिम्मेदारियों को निभाया
जानकारी के मुताबिक केशरीनाथ त्रिपाठी तीन बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर रह चुके थे। वर्ष 1977-79 के दौरान जनता पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री नियुक्त किए गए। त्रिपाठी संविधान के अच्छे जानकार थे। बंगाल के राज्यपाल रहे केशरी नाथ त्रिपाठी बखूबी यहां अपने लगाव को दिखाया।
जब सीएम से राज्यपाल का मतभेद आया था सामने
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का तत्कालीन राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के साथ एक मतभेद सामने आया था। मामला 2017 का है जब नॉर्थ 24 परगना के बादुरिया में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा की घटना घटी थी। सीएम ने कहा था राज्यपाल से उनकी फोन पर बात हुई थी। जिस तरह से उन्होंने बात की उन्हें अच्छी नहीं लगी। मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच में मतभेद जनता के सामने आना अभूतपूर्व है। वहीं केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा था कि उन्होंने कोई ऐसी बातें नहीं कही जिससे ममता बनर्जी को अपमानित महसूस हो।

शेयर करें

मुख्य समाचार

झड़ते बालों ने कर दिया है जीना दुश्वार, आजमाएं ये कारगर देसी नुस्खे

कोलकाता : बाल आपकी खूबसूरती में चार-चांद लगाते हैं लेकिन आज की लाइफस्टाइल, खान-पान और प्रदूषण के चलते बालों का झड़ना एक आम समस्या बन आगे पढ़ें »

मंत्री जी मेरी बहू को वापस घर ले आइए…

बनगांव : ‘मंत्री जी कोशिश करेंगे तो जरूर संभव होगा, मेरी बहू जरूर घर वापस लौट आयेगी।’ यह निवेदन बनगांव अंचल के गायघाटा धर्मपुर ग्राम आगे पढ़ें »

ऊपर