घात-प्रतिघात का अखाड़ा बना रहा जोड़ासांको

जो अपने थे वे अपने न रहे, पराये इतने पराये न हुए
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अपनों का साथ मिले तो हर संघर्ष कमजोर हो जाता है लेकिन यही अपने परायों का साथ देने लगे तो बाजी हाथ से निकलते देर नहीं लगती। आम जीवन में ऐसा होना लाजमी​ है, राजनीति में ऐसा संभव नहीं है। यहां बाजी अपने हाथों में लाने के लिए कई बार परायों का साथ संजीवनी साबित होता है। उससे भी बड़ी बात जनता के हाथों में सब कुछ होता है जो राजनीति में जीत या हार तय करती है। यहां हम बात कर रहे हैं जोड़ासांको विधानसभा की जहां जिन अपनों पर तृणमूल को भरोसा था वही अपने न रहे जबकि परायों ने वह परायापन नहीं दिखाया जिनकी उम्मीद नहीं की गयी थी। यहां पार्टी के लोग ही मतदाताओं को बरगला रहे थे कि किसे वोट देना है। इतना ही नहीं पार्टी के अपने कहलाने वाले इस धार के नेताओं ने ही एजेंट को जल्दी जाने का इशारा किया। इन सभी के बीच जनता अड़ी रही और उसने अपने मतदान का इस्तेमाल कर ऐसे लोगों को मुहंतोड़ जवाब दिया। जनता जर्नादन है जो अपने मत का प्रयोग कर जवाब देती है। जोड़ासांको में भी जनता का यही पैटर्न देखने को मिला। आरोप है कि जोड़ासांको में सुबह से ही वोटरों को बरगलाने में कई पार्टी के ही नेता दिखे, सुना यह तक गया कि उन्हें भाजपा को वोट देने की बात तक कही गयी लेकिन जनता ने मन बना लिया था, उसने सुनी सबकी लेकिन की अपने मन की। अब फैसला क्या होगा यह तो 2 मई को ईवीएम खुलने के बाद ही पता चलेगा।

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