सरकार के निर्देश को विश्वविद्यालयों के लिए मानना बाध्यता नहीं, राज्यपाल के निर्देश पर विवाद शुरू

आचार्य के बाद उपाचार्य ही प्रधान
उठ रहा है सवाल – क्या विश्वविद्यालयों को राजभवन ही चलायेगा ?
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य और राजभवन में बेनजीर खींचतान चरम पर है। इसी बीच राजभवन के एक निर्देश पर फिर विवाद शुरू हाे गया है। राजभवन की नयी गाइडलाइन के तहत इसमें कहा गया है कि आचार्य के बाद कुलपति विश्वविद्यालयों का प्रमुख हैं। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल कार्यालय द्वारा विश्वविद्यालयों को एक अधिसूचना जारी की गई है। साथ ही सभी रेजिस्ट्रार को भी यह निर्देशिका दी गयी है। राजभवन ने यह भी बताया है कि यह अधिसूचना क्यों जारी की गई है। बताया गया है कि कुलपतियों (वीसी) के साथ विभिन्न बैठकों में कुलपति कुछ समस्याओं का समाधान करना चाहते थे। समस्या के समाधान के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर कुछ फैसले लिए गए हैं। सबसे पहले वीसी की शक्तियों का उल्लेख किया गया है। राजभवन ने कहा कि कुलपति का रजिस्ट्रार, सह कुलपति और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों पर पूर्ण नियंत्रण होगा। वे सरकार का निर्देश मानने के लिए बाध्य नहीं है। उस आदेश के क्रियान्वयन की उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। सरकारी निर्देश में कुलपति की मंजूरी ही मान्य होगी। राज्य सरकार कोई भी आदेश जारी कर सकती है, हालाँकि कुलपति उस आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। अब या सवाल उठने लगा है कि क्या अब विश्वविद्यालयों को राजभवन ही चलायेगा ?
विवादों पर क्या कहा राज्यपाल ने
इस दिन मीडिया के सामने राज्यपाल ने कहा कि यह गाइडलाइन भ्रम दूर करने के लिए जारी की गई है। कुलपतियों के काम में कोई कठिनाई न हो, इसी उद्देश्य से ये दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। आचार्य नहीं बल्कि राजभवन की तरफ से यह निर्देशिका जारी किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, आचार्य कुलपति की भूमिका नहीं निभा रहे हैं, नहीं निभा सकते, उन्हें नहीं निभानी चाहिए। इस विशेष मामले में, छात्रों के लिए ही यह जिम्मेदारी ली गई है ताकि उन्हें अपने प्रमाणपत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। इतना ही कहा गया है, इससे न ज्यादा और ना ही कम
अधिसूचना की अहम बातें
अधिसूचना के मुताबिक, कुलपति, सह कुलपति, रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय के प्रमुख हैं। कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देशन में काम करेंगे। वे सरकार के आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। अगर कुलपति शासनादेश को मंजूरी दे देंगे, तभी इसे लागू किया जाएगा। चूंकि आचार्य (सीवी आनंदा बोस) अकादमिक प्रमुख हैं, इसलिए कुलपति, उप-कुलपति, रजिस्ट्रार उनका सहयोग करेंगे।
अभी हाल में ही राजभवन की तरफ गुरुवार को बताया गया कि राज्य विश्वविद्यालयों में जहां वीसी के पद रिक्त हैं, राज्यपाल ने आचार्य के रूप में नये अंतरिम वीसी की नियुक्ति होने तक इन विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्णय लिया है। स्टूडेंट्स के हित में यह फैसला लिया गया। अब इस नये निर्देशिका से नया विवाद शुरू हो गया है।

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