एशिया का दूसरा सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन है हावड़ा

जमीन से 33 मीटर होगा नीचे
हांगकांग में एचकेयू मेट्रो की गहराई है 70 मीटर
जनवरी 2023 तक साल्टलेक सेक्टर 5 से हावड़ा मैदान तक जायेगी मेट्रो
अंडरवाटर टनल यात्रियों को यात्रा का एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी
बॉक्स में : कुल 16.6 किलोमीटर लंबी ईस्ट वेस्ट मेट्रो परियोजना में 10.8 किलोमीटर का क्षेत्र भूमिगत होगा जबकि 5.8 किलोमीटर रेल लाइन एलिवेटेड (ऊपरी हिस्से) में होगा। इसमें कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें हावड़ा मैदान, हावड़ा स्टेशन, महाकरण, एस्प्लेनेड, सियालदह व फूलबागान स्टेशन जमीन के नीचे यानी अंडरग्राउंड होंगे, जबकि साल्टलेक स्टेशन, बंगाल केमिकल, सिटी सेंटर, सेंट्रल पार्क, करुणामयी व साल्टलेक सेक्टर-5 स्टेशन उपरी हिस्से में यानी एलिवेटेड होंगे। बता दें कि इसमें साल्टलेक सेक्टर-5 से सियालदह तक मेट्रो सेवा पहले ही शुरू हो चुकी है।
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हावड़ा शहर को अगले वर्ष यानी 2023 जनवरी तक एशिया का दूसरा सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन मिलने जा रहा है। देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक हावड़ा स्टेशन के ठीक नीचे बना हावड़ा मेट्रो स्टेशन कई मायनों में खास होगा। अधिकारियों का कहना है कि आगामी दुर्गापूजा के बाद इसका ट्रायल होगा। इसके बाद साल 2023 से इसे आमयात्रियों के लिए खोल दिया जायेगा। यह मेट्रो स्टेशन जमीन से 33 मीटर नीचे होगा जबकि एशिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन हांगकांग में है, जिसका नाम हांगकांग यूर्निवसिटी मेट्रो स्टेशन जिसकी गहराई करीब 70 मीटर यानी 230 फीट है यानी हांगकांग के बाद हावड़ा स्टेशन एशिया का दूसरा सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन होगा।
हावड़ा मेट्रो स्टेशन होगा खास
केएमआरसीएल के अधिकारियों ने बताया कि हावड़ा मेट्रो स्टेशन की लंबाई 230 मीटर और चौड़ाई 32 मीटर होगी। इसमें दो निकासी द्वार होंगे। टनल की लंबाई 10.8 किलोमीटर और चौड़ाई 5.5 मीटर है। टनल में किसी तरह पानी न प्रवेश करें। इसके लिए विशेष शॉफ्ट का इस्तेमाल किया गया है। कोलकाता मेट्रो की अंडरवाटर टनल यात्रियों को यात्रा का एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी। यह हुगली में लगभग आधा किलोमीटर तक पानी की सतह के नीचे 10 मंजिला इमारत से अधिक यात्रा करने जैसा होगा। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग आधुनिक तकनीक का चमत्कार है जो कि भारत में पहली बार हो रहा है। यूरोस्टार, जो पेरिस-लंदन अंडर सी टनल को जोड़ता है, कोलकाता मेट्रो द्वारा उपयोग की जाने वाली तकनीक के स्तर के लिए बहतरीन है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 8,572 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। इधर मेट्रो स्टेशन का गेट हावड़ा स्टेशन के 16 नंबर प्लेटफाॅर्म के पास ठीक नीचे होगा। यानी की ऑल्ड कॉम्प्लेक्स के अंतिम और न्यू कॉम्प्लेक्स के शुरूआती स्टेशनों के बीच यहीं से यात्री मेट्रो में प्रवेश करेंगे। यह गेट 100 मीटर लंबे और 8 मीटर चौड़े सबवे से जुड़ा होगा। सबवे से ही यात्री एस्केलेटर और लिफ्ट के माध्यम से मेट्रो स्टेशन के प्लेटफाॅर्म पर जा सकेंगे। हावड़ा स्टेशन से मैदान मेट्रो स्टेशन की दूरी लगभग 750 मीटर होगी।
जनवरी 2023 तक पूरा होगा ईस्ट-वेस्ट मेट्रो का काम
इधर, हाल ही में सियालदह मेट्रो का उद्घाटन करने आयी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि ईस्ट वेस्ट मेट्रो परियोजना का काम जनवरी 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा यानी अगले साल जनवरी तक हावड़ा मैदान तक मेट्रो सेवाएं आम यात्रियों के लिए शुरू हो जाएंगी। इसकी मदद से हावड़ा व सियालदह जैसे देश के व्यस्ततम स्टेशन सीधे मेट्रो सेवा से भी जुड़ जाएंगे। इससे लाखों यात्रियों को काफी लाभ होगा।
एक नजर में हावड़ा स्टेशन मेट्रो
* अधिकतम रफ्तार 80 किमी. प्रतिघंटे की होगी
* नदी के नीचे से गुजरने में 60 सेकंड से भी कम समय लगेगा
* हावड़ा मैदान से एस्प्लेनेड तक जाने में 6 मिनट का समय लगेगा
* कुल 16 किमी. के मार्ग में 10.8 किमी. जमीन के भीतर है
* मेट्रो गंगा की तलहटी से 13 मीटर नीचे से गुजरेगी
* दोनों टनल समानांतर बनाए गए हैं
* इस मेट्रो में 10 लाख यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है

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