हॉर्न नॉट ओके प्लीज : साइलेंस जोन में हांकिंग की तो खैर नहीं

3 महीने में साइलेंस जोन में हांकिंग के 452 मामले
केवल कोलकाता पुलिस में 4,530 कार्रवाई की गयी
जिला पुलिस में साइलेंस जोन में हांकिंग के मामले न के बराबर
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने हेतु कई तरह के उपाय किये जा रहे हैं। एक तरफ सभी साउंड सिस्टम में साउंड लिमिटर लगाने का निर्देश दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर, दुर्गापूजा, दिवाली और छठ पूजा के मौके पर भी डीजे व लाउडस्पीकर पर रोक लगायी गयी थी। राज्य के पीसीबी द्वारा ध्वनि प्रदूषण के लिए कई तरह की पहल की जाने के बावजूद कोलकाता में साइलेंस जोन में हांकिंग के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 3 महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो इस दौरान कोलकाता पुलिस के तहत साइलेंस जोन में हांकिंग के 452 मामले दर्ज किये गये हैं। केवल कोलकाता पुलिस में ही 4,530 कार्रवाई की गयी है। हालांकि आश्चर्य की बात यह है कि जिला पुलिस में साइलेंस जोन में हांकिंग के मामले न के बराबर हैं जबकि जिलों में काफी अधिक प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल किया जाता है।
किसे कहते हैं साइलेंस जोन और क्या है नियम
स्कूल, अस्पताल, कोर्ट, शैक्षणिक संस्थान जैसे इलाके साइलेंस जोन के तहत आते हैं। नियम है कि साइलेंस जोन के 100 मीटर के इलाके में गाड़ियों का हॉर्न काफी धीमा होना चाहिये। सक्षम प्राधिकारी द्वारा साइलेंस जोेन घोषित किया जाता है। गाड़ियों का हॉर्न, लाउडस्पीकर और पटाखे जलाना भी साइलेंस जोन में बैन रहता है।
एसएसकेएम समेत कई अस्पतालों के पास होती है समस्या
पीसीबी ने कुछ महीने पहले साइलेंस जोन में हांकिंग को लेकर एक रिपोर्ट एनजीटी में जमा की थी। इस बारे में पर्यावरणविद् सुभाष दत्ता ने सन्मार्ग से कहा, ‘सबसे अधिक समस्या एसएसकेएम अस्पताल के आस-पास होती है जहां गाड़ियों की काफी तेज आवाज के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है। एसएसकेएम के अलावा आरजीकर अस्पताल का भी इसमें नाम था जहां तेज हांकिंग के कारण मरीजों को समस्या होती है। अस्पतालों के आस-पास गाड़ियों की आवा​ज काफी कम रहनी चाहिये, लेकिन इन नियमों को माना नहीं जाता है।’ उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण की सबसे अधिक समस्या हांकिंग व उसके बाद माइक के कारण ही होती है।
एक नजर इन आंकड़ों पर (कोलकाता पुलिस)
इस साल साइलेंस जोन में हांकिंग के दर्ज मामले
अगस्त – 303, सितम्बर – 89, अक्टूबर – 60 (कुल मामले : 452)
की गयी कार्रवाई की संख्या
अगस्त – 2361, सितम्बर – 1099, अक्टूबर – 1070 (कुल कार्रवाई : 4,530)
जिलों में मामले न के बराबर
कोलकाता पुलिस में साइलेंस जोन में हांकिंग के मामले तो फिर भी हैं, लेकिन जिला पुलिस समेत अन्य कमिश्नरेट में मामले न के बराबर दर्ज किये गये हैं। हावड़ा ग्रामीण, सिलीगुड़ी कमिश्नरेट, बैरकपुर कमिश्नरेट में अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर महीने में साइलेंस जोन में हांकिंग का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और ना ही इस संबंध में कोई कार्रवाई हुई है। वहीं हुगली ग्रामीण में अगस्त महीने में कार्रवाई की संख्या 133 है जबकि सितम्बर महीने में इसकी संख्या 91 है। वहीं अक्टूबर महीने में हुगली ग्रामीण में कार्रवाई की संख्या 73 है। हालांकि दूसरे जिला पुलिस व कमिश्नरेट में किसी तरह के मामले या कोई कार्रवाई दर्ज नहीं हुई है जबकि जिलों में प्रेशर हॉर्न का काफी अधिक इस्तेमाल होता है।
कोलकाता पुलिस करेगी अकाउस्टिक कैमरा का इस्तेमाल
शहर में साइलेंस जोन के कई इलाकों में कोलकाता पुलिस द्वारा ‘अकाउस्टिक कैमरा’ का इस्तेमाल किये जाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि अभी तक यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रोडक्ट फाइनल नहीं हो पाया है। इस तरह के कैमरा लाइटवेट होने के साथ ही हैंड हेल्ड डिवाइस है जो रियल टाइम में साउंड सोर्स को लोकेट कर नतीजों को तुरंत स्क्रीन पर डिस्प्ले करता है। ये कैमरा नो हांकिंग जोन जैसे कि कॉलेज स्ट्रीट और एसएसकेएम के बाहर व शंभुनाथ पण्डित अस्पताल के जोन में लगाये जायेंगे। कोलकाता पुलिस के ज्वाइंट सीपी (ट्रैफिक) संतोष पाण्डेय ने सन्मार्ग से कहा, ‘फिलहाल कैमरा के 3 प्रोडक्ट हम देख चुके हैं, लेकिन ये प्रोडक्ट सभी मापदण्डों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ये कैमरा सोर्स को पहचान नहीं पा रहा है। ऐसे में प्रोडक्ट फाइनल होते ही इस पर आगे कदम उठाया जायेगा, फिलहाल प्रक्रिया जारी है।’
यह होगी कैमरे की खासियतें
वेस्ट बंगाल मोटर ह्वीकल रूल्स एण्ड मोटर ह्वीकल्स एक्ट के तहत उल्लंघन करने वाले मोटरसाइकिल सवारों पर 2,000 रु. तक जुर्माना लगाया जायेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कैमरा 75 डेसिबल से ऊपर के ध्वनि के सोर्स को पहचान कर ट्रेस करेगा। प्रत्येक कैमरा की कीमत लगभग 14 लाख रु. के करीब होगी।

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