खतरे के रडार पर फिजा : साइलेंट-स्लो किलर है वायु प्रदूषण

जहरीली हवा हर साल ले रही 10 लाख लोगों की जान

50 फीसदी बच्चों में बढ़ रही फेफड़े की बीमारी

70 फीसदी लोगों का फेफड़ा हो रहा खराब

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : वायु प्रदूषण के मामले में स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट, 2022 के अनुसार कोलकाता दुनिया में दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है। शहर में हवा का स्तर खतरनाक ​स्थिति पर आ गया है जिसके पीछे कई कारण हैं। शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के मौके पर इसी मुद्दे पर चर्चा की गयी तथा डॉक्टरों द्वारा हेल्थ एडवाइजरी जारी की गयी।

स्विचऑन फाउंडेशन द्वारा प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाले डॉक्टरों ने इस मुद्दे पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने बताया ​कि कैसे हवा में घुला जहर का कण लाखों लोगों को मार रहा है, यह बीमारी, विकलांगता का कारण बन रहा है, और इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

वुडलैंड्स मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजिस्ट सलाहकार डॉ. अरूप हालदार ने कहा, “दुनिया भर में बीमारियों के बोझ के अनुसार वायु प्रदूषण दुनिया में मृत्यु दर का चौथा प्रमुख कारण है और हम हर साल वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में 90 लाख लोगों को खो देते हैं। वायु प्रदूषण के खिलाफ यह जंग जागरूकता से ही लड़ी जा सकती है।

डॉ. संजुक्ता दत्ता, सलाहकार और प्रमुख, आपातकालीन चिकित्सा, फोर्टिस अस्पताल, कोलकाता और अध्यक्ष, ईएम और पब्लिक हेल्थ विंग, सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन इंडिया, डब्ल्यूबी चैप्टर ने कहा, “समय के साथ स्थिति बिगड़ती जा रही है और अब यह वास्तव में खतरनाक है। सर्दियों के दौरान शहर के अस्पताल फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों से भर जाते हैं। सभी उम्र के लोगों को ऑक्सीजन, नेबुलाइजेशन, क्रिटिकल केयर की जरूरत होती है, कई लोग मर भी जाते हैं।

डॉ. एमवी चंद्रकांत, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एनएच नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स हावड़ा ने कहा,“80 फीसदी कैंसर का कारण तंबाकू है लेकिन वायु में प्रदूषण की जो मात्रा है वह तंबाकू से भी खतरनाक है।”

अपोलो ग्लेनेगल्स अस्पताल के बाल रोग सलाहकार डॉ. कौस्तव चौधरी ने कहा, “वायु प्रदूषण एक प्रमुख पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी हालिया आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण का बाल स्वास्थ्य और जीवन पर व्यापक और भयानक प्रभाव पड़ता है।”

वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम की कार्यकारी समिति के सदस्य डॉ. कौशिक चाकी ने कहा, “बच्चों को वायु प्रदूषण से विशेष जोखिम का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके फेफड़े बढ़ रहे होते हैं।

डॉ. मनोदीपा मंडल, सलाहकार, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल और कार्यकारी समिति के सदस्य, एसोसिएशन ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डब्ल्यूबी, एआरओआई ने कहा, “एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल नवंबर के तीसरे सप्ताह में कोलकाता की वायु गुणवत्ता खराब हो गई जो दिल्ली की तुलना में अधिक है।

एसएएमएसए की महासचिव इप्सिता प्रोसाद ने कहा, “हमें अपने रोगियों को वायु प्रदूषण के प्रभाव के बारे में शिक्षित करने और हमारे स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव कम करने के तरीकों के बारे में संकल्प लेना चाहिए।”

स्विचऑन फाउंडेशन के संस्थापक विनय जाजू ने कहा, “डॉक्टरों की ओर से आने वाली इन सलाहों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वाहन उत्सर्जन सबसे बड़ा उत्सर्जक है और शहर को तत्काल आधार पर साइकिल, पैदल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।’’

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