‘सिटी ऑफ जॉय’ की सैर करायेगा दमदम का तरुण दल

पूजा कमेटी : दमदम तरुण दल
थीम : सिटी ऑफ जॉय
साज-सज्जा : कांच के टुकड़े, लकड़ी, आयरन
बजट : 50 लाख रु.
कारीगर : 60
कोलकाता : ‘कला’ शब्द से ही पश्चिम बंगाल की बात सबसे पहले मन में आती है। बात जब दुर्गा पूजा की हो तो कहना ही क्या। कलाकार अपनी कला का प्रयोग कर व छोटी-छोटी चीजों का इस्तेमाल कर एक बड़े तथा खूबसूरत पंडाल का निर्माण करते हैं। दुर्गा पूजा में कुछ ही ​दिन रह गये हैं, इसके मद्देनजर सन्मार्ग की टीम अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पंडालों की साज-सज्जा का जायजा ले रही है। इसी के तहत सन्मार्ग की टीम ने दमदम तरुण दल की पूजा का जायजा लिया।


दमदम तरुण दल पूजा का 45वां वर्ष पूरा करने जा रहा है, जिसे 50 लाख रु. की लागत से बनाया जा रहा है। इस वर्ष यहां ‘सिटी ऑफ जॉय’ थीम पर पूजा पंडाल बनाया जा रहा हैं। इस थीम के द्वारा यह पंडाल ओल्ड व न्यू कोलकाता के बीच का टाइम ट्रांसफॉर्मेशन दर्शाएगा। कोलकाता का विकास कब और कैसे हुआ यह तमाम चीजें इस पंडाल द्वारा समझायी जाएंगी। पूरे 60 कारीगरों की दिन-रात की मेहनत से सजाया जाएगा दमदम तरुण दल का ‘सिटी ऑफ जॉय’।


क्या कहना है पूजा कमेटी के सेक्रेटरी का
दमदम तरुण दल पूजा कमेटी के सेक्रेटरी विश्वजीत प्रसाद ने कहा कि यूनेस्को द्वारा पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा को सम्मानित किया गया है, इसके मद्देनजर हमने इस वर्ष की थीम ‘सिटी ऑफ जॉय’ रखी है। इस पंडाल को कांच के टुकड़े, लकड़ी व आयरन की मदद से सजाया जा रहा है।


इस थीम के द्वारा यह पंडाल ओल्ड व न्यू कोलकाता के बीच का टाइम ट्रांसफॉर्मेशन दर्शाएगा। बात करें मूर्ति की तो मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ-साथ उनके वस्त्र, आभूषण सब मिट्टी से बनाए जा रहे हैं। यहां की खास बात यह है कि पंचमी से लेकर नवमी तक भोग वितरण किया जाता है और विजया दशमी के दिन सिंदूर खेला भी होता है। यह पंडाल नई पीढ़ी को कोलकाता के विकास का सफर समझाएगा। अब ‘सिटी ऑफ जॉय’ देखना होगा और भी दिलचस्प।

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