गंगासागर मेला पर संशय, हाई कोर्ट का फैसला आज

चीफ जस्टिस के डिविजन बेंच में सुनवायी पूरी, आदेश आरक्षित
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : गंगासागर मेला पर लगा कुहांसा वृहस्पतिवार को भी नहीं छंट पाया। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस केशांग दोमा भूटिया के डिविजन बेंच में इस बाबत सुनवायी पूरी हो गई, पर बेंच ने अपना फैसला आरक्षित कर लिया। गंगासागर मेला के आयोजन पर रोक लगाने की अपील करते हुए डिविजन बेंच में एक जनहित याचिका दायर की गई है। उम्मीद की जा रही है कि शुक्रवार को फैसला आ जाएगा पर इसके नहीं आने तक संशय बना ही रहेगा।
एडवोकेट सूर्यनील दास ने बताया कि डिविजन बेंच के आदेश के मुताबिक राज्य सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की तरफ से एफिडेविट दाखिल किया गया है। इसका हवाला देते हुए एडवोकेट जनरल एस एन मुखर्जी ने कहा कि राज्य सरकार मेला पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। पुण्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के बहुत सारे उपाय किए गए हैं। करीब तीस हजार पुण्यार्थी मेला में पहुंच गए हैं और पचास हजार साधु एवं पुण्यार्थी विभिन्न स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं। करीब चार से पांच लाख पुण्यार्थियों के पहुंचने की संभावना है। मेला में पुलिस के दस हजार जवान और पांच हजार वालंटियर तैनात किए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवा का हवाला देते हुए कहा कि मेला क्षेत्र में 142 डॉक्टर और 140 नर्सें तैनात की जाएंगी। पुण्यार्थियों के लिए नौ अस्पताल चिह्नित ‌किए गए हैं और 125 आइसोलेशन बेड बनाए गए हैं। सेफ होम में 235 बेड होंगे और पांच कोविड अस्पतालों में पुण्यार्थियों के लिए 630 बेड आरक्षित किए गए हैं। रैपिड एंटीजेन टेस्ट किया जाएगा और संक्रमित होने पर सेफ होम में भर्ती कराया जाएगा। गंगासागर में डुबकी लगाने के बजाए पुण्यार्थियों को ई-स्नान के‌ लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पिटिशनर डॉ. अभिनन्दन मंडल की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट श्रीजीव चक्रवर्ती ने कहा कि गंगासागर मेला पश्चिम बंगाल के लिए कुंभ मेला की तरह कोरोना के मामले में सुपरस्प्रेडर साबित होगा। सिनेमा की कुछ हस्तियां पॉजिटिव पायी गईं तो कोलकाता इंटरनेनशनल फिल्म फेस्टिवल पर रोक लगा दी गई। बीरभूम में एक दिन के लिए लगने वाले जयदेव मेला पर रोक लगा दी गई तो किस आधार पर सरकार गंगासागर मेला के पक्ष में हैं। दोनों वैक्सीन लगाए जाने के बाद भी कोविड संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। सिर्फ कोलकाता की पॉजिटिविटी रेट 23 फीसदी से उपर चली गई है। मुंह और नाक से निकलने वाला लार्वा समुद्र के खारे पानी में बेअसर हो जाता है इस पर कोई तथ्य आधारित रिपोर्ट नहीं है। एफिडेविट इस बात पर खामोश है कि कितने डॉक्टर और पुलिस वाले पॉजिटिव पाए गए हैं। डॉक्टर्स फोरम की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट अनिरुद्ध चटर्जी ने कहा कि हमारा स्वास्थ्य ढांचा इस बड़े पैमाने पर संक्रमण का बोझ ढोने की स्थिति में नहीं है। यह चरमरा जाएगा। सरकार को इसकी जानकारी है फिर भी इसकी उपेक्षा कर रही है। जिन अस्पतालों का हवाला दिया गया है वे इस बोझ को उठाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि तैयारी अधूरी है और 232 सेफ होम और 92 पेडियाट्रिक बेड के आधार पर इतने बड़े मेला का मुकाबला करेंगे। बहस के आखिर में चीफ जस्टिस ने एजी से पूछा कि क्या आप डिजेस्टर एक्ट के प्रावधानों का ‌इस्तेमाल करने के पक्ष में हैं। इसके जवाब में एजी ने कहा कि हम ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और आप का आदेश पालन करने के लिए बाध्य हैं।

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