डीए : अनन्तकाल तक तो इंतजार नहीं कर सकते

हाई कोर्ट ने सुनवायी के बाद की टिप्पणी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डीए को लेकर दायर कंटेंप्ट मामले की बुधवार को सुनवायी करते हुए जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत के डिविजन बेंच ने कहा कि कोर्ट अनन्तकाल तक तो इंतजार नहीं कर सकता है। इस मामले की सुनवायी के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि डिविजन बेंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दायर की गई है। ‌डिविजन बेंच ने आदेश दिया कि दो सप्ताह बाद मामले की सुनवायी की जाएगी।
मामले की सुनवायी शुरू होते ही जस्टिस टंडन ने जानना चाहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी की मौजूदा स्थिति क्या है। एजी एस एन मुखर्जी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसमें कुछ त्रूटिया पाई है। अब उन्हें दूर करना पड़ेगा। जस्टिस टंडन ने जानना चाहा कि त्रूटियां क्या हैं तो बताया गया कि कोर्ट फीस जमा नहीं की गई है और कुछ तकनीकी त्रूटियां हैं। एजी ने कंटेंप्ट का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने किसी आदेश का इरादतन उलंघन नहीं किया है। भाजपा के राज्य कर्मचारी संगठन की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट कल्लोल बसु ने कहा कि राज्य सरकार इरादतन मामले को लटका रही है। उसकी कोशिश है कि इसे लंबा खींचा जाए। जस्टिस टंडन ने कहा कि जिन त्रूटियों का हवाला दिया जा रहा है वे नौ मिनट में दूर की जा सकती है। इसके बाद उन्होंने कर्मचारी फेडरेशन की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या से सवाल किया कि इस हाल में क्या किया जाए। एडवोकेट भट्टाचार्या ने कहा कि एसएलपी की त्रूटियों को दूर किए जाने के बाद हम अपील कर सकते हैं। यहां गौरतलब है कि डिविजन बेंच ने राज्य सरकार को 19 अगस्त तक सरकारी कर्मचारियों का बकाया डीए का भुगतान करने का आदेश दिया था। भुगतान नहीं हुआ तो कंटेंप्ट पिटिशन दायर कर दिया गया। इधर राज्य सरकार ने रिव्यू पिटिशन दाखिल किया तो डिविजन बेंच ने उसे खारिज कर दिया था। अप सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई है।

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