जारी है एडिनोवायरस से बच्चों की मौतों का सिलसिला, स्कूल भेजने में डर रहे हैं अभिभावक

4 दिनों में 8 बच्चों की मौत
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में लगातार एडिनोवायरस या सांस संक्रमण से बच्चों की मौतों का मामला सामने आ रहा है। पिछले 24 घंटे में फिर तीन बच्चों की मौत हो गई है। ये मामले दिन पर दिन बढ़ते ही जा रहे है, इससे परिजन भी चिंतित है। मालूम हो कि राज्य में मंगलवार से शुक्रवार के बीच 8 बच्चों की मौत हुई है। ऐसे में अभिभावक फिलहाल छोटे बच्चों को लेकर कोई रिस्क नहीं उठाना चाहते। वह बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर रहे हैं। ऐसे ही कुछ अभिभावक से बातचीत कर सन्मार्ग ने जाना की वे इस बारे में क्या सोचते हैं।
बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे अभिभावक : इस तरह से बढ़ते सांस सम्बन्धी संक्रमण ने अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खासकर के छोटे बच्चे के अभिभावक चिंतित है। संक्रमण के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में भी अभिभावक कतरा रहे हैं। ज्ञान भारती स्कूल की छात्रा की अभिभावक नेहा साव ने कहा कि कक्षाओं में हर छात्राें पर नजर नही रखा जा सकता है। ये बच्चे उम्र में छोटे है इसलिए मास्क पहनाकर कक्षा में लाना व्यवहारिक रूप से असंभव है। ऐसे में अब कोविड के बाद एडिनोवायरस सबसे बड़े सिरदर्द के रूप में उभरता हुआ सामने आ रहा है। इसलिए वह दोबारा ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवाने की मांग कर रही है। ला मार्टिनियर फॉर ब्वायज के छात्र की मां जूही सिंह ने कहा कि ये कोविड से भी बड़ी परेशानी है क्योंकि छोटे बच्चे मास्क नहीं लगाते और स्कूल जाने से वह एक दूसरे के संपर्क में आते ही है। इससे बाकी बच्चों को भी परेशानी होती है। अभी फाइनल एग्जाम हो रहे तो हम ना ही छुट्टी कर पा रहे और ना बच्चों को मास्क पहनने पर मजबूर कर पा रहे हैं। प्रियंका अग्रवाल ने कहा कि बच्चे के हेल्थ से बढ़कर कुछ नहीं है इसलिए वह अपने बच्चे को फिलहाल स्कूल नहीं भेज रही है।
क्या कहना है स्कूलों का : दिल्ली पब्लिक स्कूल, रूबी पार्क की ओर से कहा गया कि फिलहाल स्कूल में छोटे बच्चे पहले की तुलना में कम संख्या में आ रहे हैं। बच्चों को कोविड के समय से ही मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने के लिये कहा गया है। श्री श्री अकादमी की चाइल्ड सेफ्टी इंचार्ज पापिया लाहिड़ी ने बताया कि हमने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों का एक व्हाट्सएप बनाया है जहां बच्चोें के सुरक्षा से जुड़ी हर जानकारी दी जाती है। साथ ही स्कूल के शिक्षक भी अभिभवकों के संपर्क में रहते है। अगर बच्चे को कोई बीमारी है तो उसे घर पर ही रखे। वहीं कुछ स्कूलों का मानना है कि स्कूल में डेढ़ से 5 साल के छात्र आते हैं लेकिन उन्हें मास्क लगाए रखना संभव नहीं है।
एडिनो वारयस की सबसे असरदार दवाई ‘सावधानी’
वुडलैंड अस्पताल के डॉ. सिराज अहमद का कहना है कि एडिनो वायरस से बचने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में कम से कम 20 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने चाहिए। बार-बार हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए। अगर कोई बीमार है तो उसके संपर्क में ना आएं। बीमार होने पर घर पर ही रहें, घर से बाहर ना निकलें। खांसते या छींकते समय टीशू और मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।

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