सीबीआई ने अनुव्रत के ‘शैडो’ गायेन के यहां मारी रेड, मिले अहम दस्तावेज

कालिकापुर में दो तल्ला घर में सीबीआई ने चलाया तलाशी अभियान
खलासी से नगरपालिका के कर्मी और फिर बने डायरेक्टर
अनुव्रत को बाबा क्यों बुलाते हैं गायेन
बोलपुर में 4 घर और कई संपत्तियों के मालिक कैसे बने गायेन, सीबीआई कर सकती है पूछताछ
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सीबीआई की टीम अब अनुव्रत मंडल के करी​बियों पर कड़ा एक्शन ले रही है। अनुव्रत तो करोड़पति हैं ही इनके आसपास रहने वाले भी करोड़ों के मालिक है। ऐसा सीबीआई की टीम मान रही है। अनुव्रत व उनकी बेटी के बाद सीबीआई की टीम ने बोलपुर में अनुव्रत मंडल के करीबी विद्युत वरण गायेन के घर पर रेड मारी है। सीबीआई की टीम को पता चला है कि वह पहले एक ट्रक का खलासी था और अब बोलपुर नगरपालिका में डी ग्रुप का कर्मी है। यही नहीं बोलपुर नगर पालिका के कर्मचारी विद्युत वरण को स्थानीय लोग अनुव्रत का शैडो भी बोलते हैं। यहां बताते चलें कि शनिवार को अनुव्रत को आसनसोल की सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया था जहां से उन्हें 24 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया। सीबीआई की टीम अनुव्रत से सच उगलवाने का लगातार प्रयास कर रही है। यही कारण है कि अब सीबीआई की टीम उनके आसपास के लोगों पर शिकंजा कस रही है ताकि अनुव्रत सच्चाई कबूल करें। फिलहाल एक तय रणनीति के तहत सीबीआई की टीम उनके करीबियों व रिश्तेदारों को अपने स्कैनर के भीतर रख रही है।
करोड़ों के मालिक हैं गायेन
विद्युत वरण का बोलपुर के कालिकापुर में दो मंजिला घर है। यहीं पर सीबीआई की टीम ने रेड मारी। इसके अलावा गायेन अनुव्रत मंडल की बेटी सुकन्या मंडल के साथ दो कंपनियों में निदेशक भी हैं। कहा जाता है कि सुकन्या के साथ भी उनके काफी अच्छे रिश्ते हैं। सीबीआई को शक है कि उनका कनेक्शन भी इस तस्करी कांड से है। उनके करीबियों के मुताबिक गायेन अनुव्रत को बाबा कह कर बुलाते हैं। सूत्रों के मुताबिक 2011 से अनुव्रत से उनकी पहचान है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले सीबीआई ने नानूर के बसापाड़ा में तृणमूल कांग्रेस नेता करीम खान के घर की तलाशी ली थी। साथ ही सिउरी में पत्थर व्यवसायी तुलु मंडल के घर की भी तलाशी ली गयी थी। ये दोनों भी अनुव्रत मंडल के करीबी हैं। इस बार सीबीआई ने गायेन के घर की भी तलाशी ली है। सीबीआई की टीम को पता चला है कि सिर्फ बोलपुर में ही उनका 4 स्थानों पर आवास है। इसके साथ काफी संपत्तियां उसने अर्जित कर रखी है। पहले उसने अस्थायी कर्मी के तौर पर बोलपुर नगरपालिका में काम किया था, बाद में वर्ष 2012 में उसे स्थायी किया गया। इतनी बड़ी तरक्की उसे कैसे मिली सीबीआई की टीम जांच कर रही है।

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