बंगालः पढ़ने में नहीं लगता था मन, करना था कुछ रोमांचक तो किशोर ने रच डाली अपहरण की कहानी

3 किशोरों के अपहरण की जानकारी पर पुलिस अधिकारियों ने झोंक दी पूरी ताकत
आखिरकार अभिभावक के सामने आसिफ ने उगली सच्चाई
नदिया : नदिया के करीमपुर थाना इलाके के 10 वर्षीय आसिफ का पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगता था। घर से स्कूल जाने के लिए वह निकला मगर स्कूल ना जाकर उसने कुछ रोमांचक करने की सोच डाली। उसने सोचा कि क्यों न कहीं भाग जाया जाये। उसने यह भी सोचा कि क्या हो अगर उसका अपहरण हो जाये, यह सब सोच आसिफ ने लोगों को डराने की सोच ली। उसने ऐसी कहानी बनायी कि जिसमें 3 किशोरों का अपहरण कर लिया गया था और अपहरणकारियों के चंगुल से बस वह भाग पाया। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की रात करीमपुर के पांचगाछी इलाके में इधर-उधर घूम रहे आ​सिफ को कुछ लोगों ने देखा तो उसे लेकर वे लोग करीमपुर थाने में गये। उन लोगों को किशोर ने बताया था कि कुछ लोगों ने उसका अपहरण करने की कोशिश की थी। उन्होंने 3 किशोरों का अपहरण भी कर लिया है। यही जानकारी उसने भी पुलिस को दी जिससे पुलिस चौंकन्ना हो गयी। यह पु​लिस के लिए काफी जरूरी हो उठा कि ​आखिरकार कौन लोग ​इन किशाेरों का अपहरण करना चाहते थे और क्यों? करीमपुर थाने की पुलिस ने जिला पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी। साथ ही 4 संलग्न थानों को भी अलर्ट ​किया गया कि वे भी अपहरणकारियों की तलाश में जुट जाएं। कुछ देर की छानबीन के बाद पुलिस को आसिफ की कहानी में कोई सच्चाई नहीं मिली। इस पर पुलिस अधिकारियों ने आसिफ के बयानों की सच्चाई को ही खंगालना शुरू किया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह दोगाछी स्थित अपने मामा के घर से मुरुटिया थाना के केचोआडांगा में अपने घर की ओर लौट रहा था। उसके साथ 4 और लड़के थे। उसने कहा कि तभी टोटो पर कुछ लोग वहां पहुंचे और उन्हें बुलाया। जब वे लोग टोटो के पास गये तो टोटो ड्राइवर ने उन्हें चॉकलेट खाने को दिया और उनको टोटो पर बैठा लिया। चॉकलेट खाने के कारण वे तीनों सो गये जबकि वह चॉकलेट नहीं खाया था इस कारण वह होश में था। वह चलते टोटो से कूद गया जिसके बाद ही पांचगाछी में कुछ लोगों ने उसे घूमते हुए पाया और थाना ले गये। बताया गया है कि लगातार पूछताछ के बाद भी वह यही सब दोहराता रहा। आखिरकार पुलिस ने उसके माता-पिता को बुलाया। उनके सामने ही किशोर से पूछताछ की तो टूट गया। वह रोने लगा और आखिरकार उसने स्वीकार किया कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उसे पढ़ाई लिखाई करने में अच्छा नहीं लगता था, उसे डांट न पड़े और स्कूल जाने से उसे मना कर दिया जाये। अभिभावकों का अधिक अटेंशन उसे मिले इस कारण उसने ऐसी कहानी बना ली। कई घटों की मशक्कत के बाद आखिरकार सच्चाई सामने आयी तो पुलिस ने राहत की सांस ली।

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