बहूबा​जार मेट्रो आपदा : बार-बार छोड़ना पड़ रहा है घर, कब तक चलेगा ऐसे

होटल में रह रहे मदन दत्त लेन के प्रभावित लोगों ने कहा
पहले कोरोना ने कमर तोड़ी और अब मेट्रो तोड़ रही है
कोलकाता : होटल में रहना मानो जीवन का एक हिस्सा हो गया है। यह लेकर तीसरी बार है​ कि जब बहूबा​जार के लोगों का होटल अस्थायी ठिकाना बन गया। सेंट्रल एवेन्यू के एक होटल में रह रहे प्रभावित लोगों ने कहा कि बार-बार घर छोड़ना पड़ रहा है, पता नहीं यह कब तक चलेगा। मदन दत्त लेन के रहनेवाले शैलेंद्र गुप्त नामक एक युवक ने कहा कि पहली बार साल 2019 में 31 अगस्त को दुर्गा पिटुरी लेन के निवासियों को होटल में रखा गया। इसके बाद मई में ऐसी घटना दोबारा हुई। शैलेंद्र ने कहा कि तब तो ये दरारें उनकी गली तक नहीं पहुंची थीं, फिर भी उन्हें एक महीने तक होटल में रहना पड़ा था। इस बार तो गली में ही दरारें आ गयी हैं। मेरा घर भी बाकी नहीं रहा। अब यहां कब तक रहना होगा पता नहीं। शैलेंद्र का कहना है कि मेट्रो को पहले ही सर्तक कर देना चाहिए था। शुक्रवार को जब सभी लोग ​चिल्लाने लगे तब जाकर आंखें खुलीं और लोग बाहर निकले। बीमार मां बाप को लेकर उसी होटल में रह रही अदिति सिंह जो कि लोरेटो कॉलेज की सेकेंड इयर की छात्रा है, उसका कहना है कि मां तो बीमार है ही और पिता भी बीमार हैं। पिता को क्षय रोग है। बहुत दवा खानी पड़ती है। किसी तरह मैं उनके साथ इस होटल में आयी हूं। मैं जल्दी में सारी दवाइयाँ नहीं ला सकती थी। मुझे नहीं पता कि बीमार माता-पिता के साथ होटल के कमरे में कैसे रहना है। मुझे नहीं पता कि मुझे ऐसे कितने दिन बिताने हैं। मेट्रो अधिकारियों ने हमें पहले चेतावनी क्यों नहीं दी? अदिति ने कहा कि वह जल्दी में अपनी किताबें भी नहीं ला सकी। घर में दरार आने के कारण युवती को यह भी नहीं पता कि वह घर में प्रवेश कर पाएगी या नहीं। अगर वह प्रवेश नहीं कर पाती है तो उसे इस बात की चिंता सता रही है कि वह अपने माता-पिता की दवा और अपनी किताबें कैसे लाये। मदन दत्ता लेन के ठीक बगल में 106 बीबी गांगुली स्ट्रीट पर बस्तापट्टी में लगभग 20 दुकानों में आयी दरार के बाद देवनारायण साव, सौरभ साव, राजेश साव जैसे दुकानदार घबरा गए। इलाके के लोगों की चीख-पुकार से वे उठे तो देखा कि उनकी दीवारें भी टूट चुकी हैं। जब वे बाहर निकले तो देखा कि न केवल घर की दीवारें, बल्कि घर का फर्श और छत भी टूट चुकी है। जान जोखिम में डालकर वे सड़कों पर आ गए। मेट्रो अधिकारियों ने उन्हें अपने होटल जाने के लिए कहा, लेकिन वे जोखिम उठाकर घर लौट गए। उनका सवाल है कि बिजनेस का सामान छोड़कर होटल जाना कैसे संभव है? राजेश ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले मेट्रो अधिकारियों को सूचित किया था कि दुकान का एक हिस्सा खाली हो गया है। इसे ठीक होने दें, लेकिन मेट्रो प्रशासन ने पहल नहीं की। अब उन्हें होटल जाने को कहा गया है। हालांकि मेट्रो अधिकारी इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकते कि वे होटल में जाकर कब अपने घर लौट पाएंगे।

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