खिलाड़ी हूं, खेलना मेरा जुनून है, जो मौका देगा उसका साथ दूंगा : बाबुल

बोले, जिसने प्ले 11 में खेलने का मौका दिया वहां खड़ा हूं
मेरे लिए ममता बनर्जी ही लोकप्रिय हैं
सुकांत को भावी योजनाओं के लिए शुभकामनाएं
सोनू ओझा
कोलकाता : दिल लगाकर काम करो, दिल से गाना गाओ। ममता बनर्जी की इस सलाह को मानते हुए बाबुल सुप्रियो अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हो चुके हैं। 7 साल तक देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा में मंत्री रहने के बाद अब बाबुल बंगाल की सबसे बड़ी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की छांव तले आ चुके हैं। यह बदलाव कोई छोटा बदलाव नहीं है बल्कि संगठन से लेकर सरकारी स्तर पर बहुत कुछ परिवर्तन करने वाला है तृणमूल नेता बाबुल के लिए। परिवर्तन के इस दौर में बाबुल कैसे खुद को सही दिशा में ले जा रहे हैं, इस बारे में उनसे बात की सन्मार्ग ने जहां उन्होंने साफ कह दिया कि मैं उसी के साथ हूं जो मुझे प्ले 11 में खेलने का मौका देगा, मुझे उस काबिल समझेगा।
दीदी के मंत्री या तृणमूल के पार्टी मैन क्या चाहेंगे बाबुल
दोनों…मेरे लिए दोनों ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मैं जहां से आया हूं वहां मैंने अपने हिस्से का काम किया है। 2014 में जब मैं पहली बार सांसद बना था उस दौरान मेरे प्रचार में मेरी गायिकी अधिक दिखी थी क्योंकि मैं पेशे से गायक हूं। मेरी दूसरी पारी में मैंने अपने काम की बदौलत जीत हासिल की। यह बात और है कि मेरा काम दिखा नहीं और मुझे प्ले 11 में खेलने का मौका न देकर बैठा दिया गया। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो जनता के पैसे लेकर, उनके विश्वास को हासिल करने के बाद छंटे हुए खिलाड़ी की तरह पीछे बैठ जाऊं। प्ले 11 में खेलने का मौका मुझे जो देगा मैं उसके साथ ही खड़ा रहूंगा और मैंने वही किया है जिसकी मुझे खुशी है।
लोकप्रियता की बात करें तो मोदी या ममता
लोकप्रियता में ममता बनर्जी का नाम आता है यह सच है। मैं अपनी बात कहूं तो अभी मैं तृणमूल में हूं और लाजमी है कि मेरे लिए मेरी पार्टी प्रमुख सबसे आगे होंगी। लोक​प्रियता में भी मैं उन्हें ही आगे रखूंगा।
दिलीप घोष या डॉ. सुकांत मजुमदार कौन बेहतर है
सुकांत पढ़े-लिखे सुलझे हुए इंसान हैं। संसद में हम साथ काम किए हैं, वहां हमने देखा संसद के भीतर नेता एक-दूसरे से लड़ते हैं, संसद चलने नहीं देते और फिर सेंट्रल हॉल में साथ मिलकर चाय पीते हैं। तो ऐसा होता है राजनीति में। सुकांत के लिए कहूंगा कि वह बेहतर काम करें उसकी शुभकामनाएं हैं। यह दायित्व मिलने के बाद उसने मेरे बारे में भी बात की जो सुनकर अच्छा लगा। दिलीप घोष ने भी मेहनत की थी उनका भी काम खराब नहीं था।
कैलाश टीम के साथ काम किया है, अब अभिषेक की टीम संग है क्या अंतर है
अभी तो मैं तृणमूल में आया ही हूं। दो दिन पहले ही अभिषेक के साथ लंच किया, साथ मिलकर खूब बात हुई। साथ काम करेंगे, आशा है सब अच्छा ही होगा। कैलाश विजयवर्गीय और उनकी टीम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहूंगा अब।
राष्ट्रीय राजनीति में तृणमूल की जगह
इसमें ज्यादा कुछ कहने का नहीं है। पार्टी अच्छा काम कर रही है, जगह बना रही है। सबका साथ पार्टी को उसकी जगह दिलाएगा ही।
दीदी ने कहा है दिल से गाओ, बाबुल क्या गाएंगे
अभी जल्दबाजी हो जाएगी इसके लिए। जब मौका आएगा तो जरूर कुछ गाऊंगा। मैं गायक हूं, संगीत से जुड़ा हूं और मैं नहीं छोडूंगा। तृणमूल में आना मेरे लिए इस नजरिये से भी अच्छा संकेत है क्योंकि ममता बनर्जी खुद संगीतप्रेमी हैं।

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