आखिर किसके आदेश पर नियुक्ति पत्र जारी किया गया था, सीबीआई ने पूछा पार्थ और कल्याणमय से

शांतिप्रसाद को भी साथ बिठाकर आज हो सकती है पूछताछ
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बहुचर्चित एसएससी भ्रष्टाचार मामले में शनिवार को कई चरणों में पार्थ चटर्जी और कल्याणमय गांगुली से सीबीआई की टीम ने पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसई) के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली ने जहां इस भ्रष्टाचार का पूरा ठिकरा पार्थ चटर्जी पर फोड़ दिया तो वहीं पार्थ चटर्जी का कहना है कि भले ही वे मंत्री थे लेकिन दिन – प्रतिदिन की गतिविधियों की जानकारी उन्हें नहीं थी। अब आज रविवार को इस छानबीन में एसएससी के पूर्व सलाहकार शांतिप्रसाद सिन्हा को भी शामिल किया जाएगा और उनसे भी पूछताछ की जाएगी। शनिवार को अलीपुर कोर्ट में सीबीआई के हाथों गिरफ्तार शांतिप्रसाद सिन्हा को पेश किया गया जहां से कोर्ट ने उन्हें फिर से सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।
तीनों को एक साथ बैठाकर हो सकती है पूछताछ
पार्थ चटर्जी, कल्याणमय के साथ अब शांतिप्रसाद को भी एक साथ बिठा कर सीबीआई की टीम पूछताछ कर सकती है। इन सबसे अकेले -अकेले में पूछताछ की जा चुकी है जहां ये तीनों खुद को निर्दोष और दूसरे को कुसूरवार बताते हैं, अब देखना यह है कि जब एक साथ बिठाकर पूछताछ की जाएगी तो वे क्या कहते हैं। क्या सच्चाई उगलते हैं? विशेष अदालत ने सीबीआई भर्ती भ्रष्टाचार मामले में एसएससी के पूर्व सलाहकार शांतिप्रसाद सिन्हा को 22 सितंबर तक सीबीआई हिरासत में रखने का आदेश दिया है। हाल ही में मध्य शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गंगोपाध्याय को भर्ती भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था। कल्याणमय की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को हिरासत में ले लिया है, जिन्हें इस मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था और अब इस संदर्भ में केंद्रीय जांच एजेंसी ने शांतिप्रसाद को फिर से हिरासत में ले लिया।
कैसे चलता था यह गोरखधंधा, एक – एक परत खोलेगी अब सीबीआई
सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से घटना हो रही है, पार्थ, कल्याणमय और शांतिप्रसाद से आमने-सामने पूछताछ में सीबीआई की टीम की यही कोशिश रहेगी कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाया जा सके। इसके अलावा सीबीआई की टीम इस भ्रष्टाचार कांड की परत-दर-परत सच्चाई बाहर लाने की कोशिश करेगी। आखिर किसके आदेश पर नियुक्ति पत्र जारी किया गया था ? नियुक्ति पत्र में उनकी क्या भूमिका थी ? सीबीआई इस बारे में इनसे जानना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक तीनों लोगों से आमने-सामने पूछताछ करने पर काफी कुछ सामने आ सकता है। इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में पहला नाम शांतिप्रसाद का था। उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त बाग कमेटी की रिपोर्ट में शांतिप्रसाद का भी नाम था। जांच एजेंसी ने शनिवार को अदालत में शिकायत की कि शांतिप्रसाद जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
ईडी की भी नजर पूरे घटनाक्रम पर
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखोपाध्याय को भर्ती भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी की तलाशी के दौरान बेलघरिया व टालीगंज स्थित अर्पिता के दो फ्लैटों से करीब 50 करोड़ रुपये नकद बरामद किये गये। इसके अलावा सोना भी मिला था। साथ ही कई दस्तावेजों से जांचकर्ताओं को पार्थ-अर्पिता से जुड़ी कई संपत्तियों का पता चला। अर्पिता फिलहाल जेल हिरासत में है। पार्थ भी जेल में थे। सीबीआई ने शुक्रवार को उन्हें हिरासत में ले लिया।
प्रसन्न राय व प्रदीप सिंह ने खोले कई राज
भर्ती भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार दो ‘मिडिल मैन’ प्रसन्नकुमार राय और प्रदीप सिन्हा ने पूछताछ में कई जानकारी सीबीआई को मुहैया करायी है। सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ताओं को पता चला है कि ‘मिडिल मैन’ प्रसन्न की कंपनी की कार शिक्षा विभाग में इस्तेमाल की गई थी। सूत्रों का दावा है कि प्रसन्न की कंपनी की कार का इस्तेमाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के पूर्व सलाहकार शांतिप्रसाद सिन्हा के कार्यालय में भी किया गया था। इस संदर्भ में सीबीआई की टीम आज शांतिप्रसाद से पूछताछ कर सकती है।

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