गुवाहाटी के एडीआरएम व अन्य के यहां छापामारी में अब तक 1.75 करोड़ जब्त

सिलीगुड़ी व कूचबिहार सहित अन्य स्थानों पर पड़े छापे
करोड़ों की संपत्ति का पता चला
हवाला के जरिये पहुंचाये गये 50 लाख किसके, हो रही है जांच
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार गुवाहाटी के एडीआरएम जे पी सिंह व अन्य 6 लोगों के यहां छापामारी में अब तक 1.75 करोड़ कैश जब्त किये गये हैं। घूसखोरी के इस मामले में सिलीगुड़ी और कूचबिहार में आगे की तलाशी करने पर सभी 7 अभियुक्तों की गिरफ्तारी के दौरान कुल रिश्वत की राशि 1.75 करोड़ मिली। इसमें बुधवार को करीब 1.28 करोड़ रुपये एक ठेकेदार विष्णु गुप्ता, उसके भाई सुरेश गुप्ता और एक अन्य ठेकेदार दिलीप घोष के परिसरों से मिले हैं। इसके अलावा कुछ रेलवे से जुड़े अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए। वहीं गत सोमवार को 47 लाख रुपये गुवाहाटी के एडीआरएम के सिलीगुड़ी आवास से मिले। उन्होंने रेलवे में ठेका दिलाने के लिए 50 लाख रुपये की राशि मांगी थी।
14 जनवरी को हुई थी एफआईआर
सीबीआई की टीम ने एडीआरएफ के खिलाफ 14 जनवरी को मामला दर्ज किया था। इसमें उनके अलावा एस. के. देब, कांट्रैक्टर, हरिओम गिरि, विष्णु गुप्ता, सुरेश गुप्ता, दिलीप घोष के खिलाफ भी मामले दर्ज किये गये। सीबीआई के मुताबिक ये सभी ठेकेदार गलत तरीके से रेलवे की ठेकेदारी लेना चाहते थे। ऐसा आरोप था कि अभियुक्तों ने ठेका करार देने में निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने के इरादे से एक साजिश रची थी। यह भी छानबीन की जा रही है ​कि उन्हाेंने अब तक ऐसे कितने ठेके का आवंटन किया है। इसके लिए सीबीआई की टीम रेलवे के अन्य अधिकारियों के बयान भी दर्ज कर सकती है।
गुवाहाटी एडीआरएम की आदत में शामिल था घूस लेना
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक उनकी आदत में घूस लेना शामिल हो गया था। इससे पहले जब वे न्यूजलपाईगुड़ी, एनएफआर में चीफ इंजीनियर थे तो उनकी पहचान इनमें से कुछ ठेकेदारों से हुई थी। उनके सिलीगुड़ी के पुराने आवास, दिल्ली, नरोरा, गुवाहाटी, सिलीगुड़ी और अलीगढ़ सहित अन्य कई ठिकानों पर छापामारी में करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। आरोप है कि न्यू जलपाईगुड़ी में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने ठेका देने के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठे हैं। 50 लाख रुपये तो सिर्फ हवाला के जरिये उनके पास पहुंचाए गये थे। सीबीआई को शक है कि उन्होंने कई संपत्तियां अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी ली हो। आरोप है कि आईआरएसई 1997 बैच ने ठेकादारी में ठेका देने के लिए खुद ही माप पुस्तिका तैयार करने, लंबित बिलों के शीघ्र भुगतान करने और उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे में चल रहे निर्माण कार्य के साथ-साथ सुरक्षा जमा और बैंक गारंटी की शीघ्र रिहाई के लिए रिश्वत लिया था।

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