मिथुन राशिफल 10 नवंबर से 16 नवंबर

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मिथुन राशि वाले ऐसे होते हैं (जिनके नाम का पहला अक्षर हो – का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) : हर काम में जिज्ञासा और खोजी दिमाग वाले मिथुन राशि के जातक हाजिर जवाब और फ़ुर्तीले होते हैं आमतौर पर मिलनसार और बातचीत करने को तैयार रहने वाले मिथुन राशि के लोग बहुत अर्थपूर्ण होते हैं। इस राशि के तहत पैदा हुए लोग अक्सर महसूस करते हैं कि वे थोड़े अकेले हैं, इसलिए वे हमेशा नए दोस्त, सलाहकार, सहकर्मियों और लोगों से बात करने के लिए तैयार रहते हैं। जीवन शक्ति से भरपूर मिथुन राशि में जन्मे जातक बहुमुखी होते हैं और जो विषय वे चुनते हैं उसकी अद्भुत समझ रखते हैं। ये न केवल अच्छे वक्ता होते हैं बल्कि अच्छे श्रोता भी होते हैं।

इनके लिए रिश्ते भी बहुत मायने रखते हैं जिसके लिए ये अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर उनसे मिलते हैं। इस राशि के लोगों का बदलता स्वभाव और खुले विचार उन्हें एक अच्छा कलाकार, विशेष रूप से लेखक और पत्रकार बना सकता है। कभी-कभी ये दोहरा व्यवहार भी प्रदर्शित करते हैं और मूडी भी होते हैं। एक ही समय में बहुत कुछ जानने की इच्छा रखने वाले मिथुन राशि के लोग हर काम को जल्दबाजी में करते हैं और यही इनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

मिथुन राशि

मिथुन : दिन खर्च प्रधान दिन बने रहने की आशा है, मन में कभी-कभी खिन्नता का अनुभव कर सकते हैं, तनाव से बचें, धैर्य से काम लें।

साप्ताहिक राशिफल: मानसिक स्थिति को नियंत्रित रखने हुए प्रतिकूल विचारों का त्याग करना आपको जो विचारशक्ति देगा, वह प्रगति की तरफ होगा। थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव के बावजूद कर्मक्षेत्र में संभावनाओं की कमी नहीं रखेगा लेकिन अंधाधुंध निर्णय लेने से बचना होगा। इष्ट मित्र एवं पारिवारिक सदस्यों से कोमल व्यवहार आपमें ऊर्जा का संचार करेगा।

दिनांक 10 को आमोद, 11 को लाभ, 12 को प्रसन्नता, 13 को चिंता, 14 को खर्च, 15 को समाधान, 16 को प्रगति। मिथुन लग्न के लिए सप्ताह उतार-चढ़ाव से भरा हो सकता है। शुभदिन 11,12 और 16 नवम्बर एवं शुभांक 3-5-9।

मिथुन वार्षिक राशिफल 2019:यह वर्ष आपके लिए प्राय: सामान्य ही रह सकता है। बार- बार विचार- परिवर्तन करना आपको परेशानी में डालता रहेगा और मानसिक अस्थिरता का प्रभाव आपके कर्मक्षेत्र पर पड़ने से अवसाद भी बढ़ता रह सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए सुदृढ़ रहना आवश्यक होगा। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी, फरवरी और मार्च के महीने प्राय: सामान्य बने रह सकते हैं किन्तु कई मद में खर्च करना अनिवार्य हो सकता है जिससे आर्थिक उतार- चढ़ाव का अनुभव होता रहेगा। खर्चीले मद कुछ कल्पित और व्यर्थ भी सिद्ध हो सकते हैं। विवादों से बचते रहना न्यायिक बातों के लिए अच्छा हो सकता है। अपने आपको संयत रखना शारीरिक और मानसिक बल की वृद्धि में सहायक होगा। इस अवधि में आर्थिक वातावरण संतोषप्रद हो सकता है किन्तु अन्य क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल, मई और जून आर्थिक बातों के लिए संतोषप्रद हो सकते हैं क्याकि रुकावटें कम होंगी और आपके विचार कुछ स्पष्ट रह सकते हैं। लाभ- हानि के बीच से गुजरती हुई अवधि संतानपक्ष से असंतोष उत्पन्न कर सकती है। इस अवधि में आस्तिक प्रवृत्ति आपकी रक्षा कर सकती है। तीर्थाटन के लिए समय निकालना आने वाली तिमाही के लिए छोटी- मोटी उन्नति में सहायक हो सकता है। शारीरिक स्वास्थ्य विशेषकर स्नायुविक और मांसपेशियों की समस्या दे सकता है। जीवनसाथी और निकटस्थ मित्रों से सहयोग मिलने से राहत का अनुभव हो सकता है। तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीने अस्त- व्यस्तता से भरे हो सकते हैं। सहयोग की कमी रहेगी और दूसरों पर अविश्वास समस्या बढ़ा सकता है। पारिवारिक सदस्यों की आवश्यकता को समझ कर उसका निराकरण करना आवश्यक हो सकता है ताकि आपकी विश्वसनीयता को कोई आंच न आ सके। इस अवधि में कोई भी आर्थिक वादा न करना ही स्वस्ति दे सकता है। इस अवधि किसी की भूमिका बन सकती है जो आपके योग्य होगा और आपकी कर्मठता को जागृत कर सकता है। अगर आप नौकरीपेशा वाले हैं तो उच्चाधिकारियों और सहयोगियों से अच्छे संबंध बनाए रहें। व्यक्तिगत तनाव को लेकर कर्मक्षेत्र में व्यवहार करना हानि पहुंचा सकता है। इस तिमाही के अंतिम भाग में काम- धंधे में अनुकूलता, नौकरी में उन्नति और अन्य सांसारिक सुख की झलक पा सकते हैं जिसका फलीभूत होना चौथी तिमाही में हो सकेगा।

अंतिम तिमाही अर्थात् अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर की अवधि धीरे- धीरे समस्या से मुक्त रहने की हो सकती है जिसके लिए मानसिक और नैतिक शांति की भूमिका अनिवार्य होगी। ऋण लेने से बचना होगा और कोर्ट- कचहरी को अंतिम रास्ता मानकर कदम बढ़ाना पुन: समस्या में डाल सकता है। यथास्थिति का पालन और मांगलिक प्रयत्न को भी समय देना उचित होगा। महिलाएं अभी सजावट, शृंगार या अन्य शौक की चीचों पर आकर्षित नहीं हो तो अच्छा रहेगा। विद्यार्थी कठिन श्रम से सफल हो सकते हैं। मिथुन लग्न के लिए धैर्य और उपस्थिति आवश्यक होगी। अच्छे परिणाम के लिए भगवान श्रीविष्णु के हजार नामों का अर्चन प्रति शुक्लपक्ष की द्वादशी को तुलसीपत्र से करना उचित होगा। वर्ष भाग्यांक 1, 4 और 7।

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