

मिदनापुर: पश्चिम मिदनापुर जिले के शालबनी के कर्णगढ़ स्थित रानी शिरोमणि के गढ़ के जीर्णाेद्धार का कार्य शुरू हो गया है। रानी शिरोमणि के गढ़ के खंडहरों के जीर्णाेद्धार के दौरान, कई प्राचीन मेहराबों, दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियों, सीढ़ियां और एक अन्य मंदिर के अंदरूनी हिस्से से मिट्टी निकाली गई। इसे देखकर पश्चिम मिदनापुर ज़िला प्रशासन को इस स्थापत्य कला के लिए उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दे रही है। अधिकारियों का दावा है कि इसके परिणामस्वरूप, वहाँ और अधिक पर्यटक आएंगे।
कर्णगढ़ पश्चिम मिदनापुर जिले में जिला शहर मिदनापुर से महज 10 किलोमीटर दूर है। शालबनी ब्लॉक में स्थित कर्णगढ़, ब्रिटिश-विरोधी चुआड़ विद्रोह की नेता रानी शिरोमणि का गढ़ था। यह स्थापत्य कला जीर्ण-शीर्ण हो रही थी। इसके जीर्णोद्धार की मांग पहले भी उठती रही थी। इस बार, जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले हेरिटेज आयोग ने इस कार्य के लिए पहले ही 2.42 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं। उस धनराशि के आवंटन के बाद, लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) ने काम ज़ोर-शोर से शुरू कर दिया है। क्षेत्र के निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों को उम्मीद है कि किले की खुदाई का काम शुरू होने पर और भी ऐतिहासिक या पुरातात्विक कलाकृतियाँ मिलेंगी। इस ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण किले के कई मंदिरों या स्थापत्य स्मारकों को पहले ही संरक्षित पुरावशेष या राज्य संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त है। इसके साथ ही, किले के जीर्णाेद्धार के लिए राज्य सरकार को आवेदन भी किया गया था। इस बारे में जिला सूचना एवं संस्कृति अधिकारी वरुण मंडल ने बताया कि कुछ महीने पहले इस किले के जीर्णाेद्धार के लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वहीं शालबनी के बीडीओ रोमन मंडल ने कहा, इस किले का जीर्णाेद्धार कार्य इसकी मूल वास्तुकला को बरकरार रखते हुए किया जाएगा। उन्होने कहा कि आशा है कि इस ऐतिहासिक स्थान को देखने के लिए काफी संख्या में लोग आ सकते हैं जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।