राष्ट्रपति ने नीट संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दी

राज्यों को एक साल की छूट, निजी मेडिकल कालेजों को कोई रियायत नहीं
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एमबीबीएस एवं दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए इस साल होने वाली संयुक्त मेडिकल प्रवेश परीक्षा से राज्य बोर्डों को बाहर रखने संबंधी अध्यादेश पर कुछ सवाल उठाने के बाद मंगलवार को हस्ताक्षर कर दिये।
आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि राष्ट्रपति ने सभी सवालों के समाधान के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के पहुंचने के बाद मंगलवार सुबह इस अध्यादेश को लागू कर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा था जिस पर जवाब देने के लिए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी मंगलवार की सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ राष्ट्रपति सचिवालय में मौजूद थे। राष्ट्रपति के पास यह अध्यादेश शनिवार को भेजा गया था और मंगलवार को सुबह वे चीन की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत शुक्रवार को नीट पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी जिसका उद्देश्य उच्चतम न्यायालय के उस आदेश को ‘आंशिक’ तौर पर बदलना था जिसमें राज्य एवं निजी कालेजों द्वारा ली जाने वाली बहु मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के साथ भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी संज्ञान लिया गया था। अदालत ने यह निर्देश दिया था कि समूचे भारत में एमबीबीएस एवं दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक संयुक्त मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ आयोजित की जायेगी।
गौरतलब है कि राज्य सरकारों ने इस साल से इसके कार्यान्वयन पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह छात्रों के लिए बहुत तनावपूर्ण होगा क्योंकि इसके पाठ्यक्रम की तैयारी के लिए छात्रों के पास बहुत सीमित समय है और भाषा का भी मामला है। राज्य सरकारों ने कहा कि राज्य बोर्डों से संबद्ध छात्रों के लिए जुलाई से पहले एकीकृत परीक्षा में शामिल होना मुश्किल होगा और केंद्रीय बोर्ड से संबद्ध छात्रों की तुलना में ऐसे छात्र नुकसान में रहेंगे। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय द्वारा उसकी याचिका खारिज किये जाने के बाद अध्यादेश का रास्ता अपनाने का फैसला किया। अलग अलग राज्यों ने यह चिह्नित किया कि विभिन्न निजी मेडिकल कालेजों में राज्य कोटा के लिए 12-15 प्रतिशत के बीच सीट हों ताकि किसी एक राज्य के छात्रों के लिए किसी अन्य राज्य के कालेजों में सीट मिल सके। राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों की हाल की बैठक के दौरान पंद्रह से अधिक राज्यों ने नीट का विरोध किया और अलग-अलग पाठ्यक्रम एवं भाषा जैसे मुद्दे उठाये। मंगलवार को जारी यह अध्यादेश इस राजग सरकार का 21 वां अध्यादेश है। इनमें से सबसे अधिक विवादास्पद अध्यादेश भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन से संबंधित था।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के सबंध में लाये गये अध्यादेश के तहत केवल राज्यों को एक साल की छूट दी गयी है जबकि निजी मेडिकल कालेजों को कोई रियायत नहीं दी गयी है। उन पर नीट के प्रावधान पूरी तरह लागू रहेंगे। अध्यादेश पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में नड्डा ने कहा की मीडिया के कुछ हलकों में यह गलत अफवाह फैलायी गयी है कि सरकार नीट को खत्म करने के लिए अध्यादेश लेकर आयी है जबकि हकीकत यह है कि नीट एक मई से लागू हो गया है। अध्यादेश के जरिये इसमें बस इतना बदलाव किया गया है कि जो राज्य चाहें वे इसमें शामिल हो सकते हैं और जो नहीं चाहते उन्हें अगले साल तक के लिए छूट दी गयी है लेकिन अगले शिक्षा सत्र से इसे देशभर के सभी सरकारी मेडिकल कालेजों में इसे अनिवार्य रुप से लागू कर दिया जायेगा। निजी कालेजों में यह एक मई से लागू हो चुकी है। नड्डा ने कहा कि बिहार सहित सात राज्यों ने नीट के तहत आने का फैसला किया है। दिल्ली में अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है। वह आना चाहे तो आ सकता है। कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश ने इससे बाहर रहने का विकल्प चुना है। उन्होंनें कहा कि अध्यादेश लागू होने पर सरकारी मेडिकल कालेज स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं ले सकेंगे लेकिन इस साल दिसंबर से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सभी परीक्षाएं नीट के तहत ही होंगी। इस बीच नीट के अध्यादेश पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए याची के वकील ने इसे पूरी तरह असांविधानिक और गैर कानूनी बताते हुए कहा है कि इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जायेगी। एजेंसियां

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