एससी-एसटी एक्‍ट पर भारत बंद का रहा मिला-जुला असर, क्यों सवर्ण हुए नाराज

हिसार : एससी-एसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का असर जारी है। वहीं मध्य प्रदेश राज्य और आस-पास के क्षेत्र तथा हरियाणा प्रदेश में इक्का दुक्का जगहों को छोड़ दें तो इसका व्यापक असर देखने को नहीं मिला। हिसार के बरवाला और उकलाना क्षेत्र में स्वर्ण वर्ग के लोगों ने हालांकि विरोध स्वरूप बाजार भी बंद रखे। मगर इसके अलावा रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद, झज्जर, बहादुरगढ़ और चरखी दादरी और भिवानी समेत अन्य जिलों में कहीं भी बड़ा आंदोलन देखने को नहीं मिला। वहीं स्वर्णो ने सरकार के काम पर सवाल उठाते हुए एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटना गलत बताया है।

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर 2 अप्रैल को भारत बंद किया था
मालूम हो कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करते हुए को मामला दर्ज होते ही आरोपित की तुंरत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दलितों ने इसके विरोध स्वरूप 2 अप्रैल को भारत बंद भी किया था। जिसमें हिंसक झड़प के अलावा आगजनी जैसी कई घटनाएं हुई थी। वहीं इसके बाद सरकार ने एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद सरकार द्वारा फिर से संशोधन किया गया है। और एक्ट में पहले की तरह नियमों को लागू कर दिया है।

न्यायालय के फैसले को बहाल करना चाहते हैं सवर्ण
एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सवर्ण समुदाय राहत देने वाला मानता है। सवर्ण समुदायों का कहना है कि इस एक्ट का दुरुपयोग कर उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाता है। सवर्ण समुदाय एससी/एसटी एक्ट पर शीर्ष न्यायालय के फैसले को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि कोर्ट का फैसला सही है लेकिन वोट बैंक में दबाव आकर सरकार ने एक्ट को उसके पुराने स्वरूप में बहाल कर दिया है जिसका कि वे विरोध कर रहे हैं। दरअसल, दलित समुदाय के विरोध प्रदर्शनों एवं अपने ही दलित समर्थक सहयोगी दलों के दबाव को देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने का फैसला किया। सरकार ने मानसून सत्र में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से संबंधित विधेयक को मंजूरी दे दी। सरकार के इस कदम के बाद सवर्ण संगठन नाराज हो गए हैं। सवर्ण समुदायों ने गंभीर परिणाम भुगतने की दी है धमकी

मागें नहीं मानी तो भुगतने पड़ सकते है गंभीर नतीजे
सवर्ण समुदायों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मागें नहीं मानी गईं तो सरकार को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। सवर्ण संगठनों की भारत बंद की तैयारी को देखते हुए देश में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 35 संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने कई जिलों में धारा-144 लगाई है। एससी/एसटी एक्ट के तहत तुरंत होती है गिरफ्तारी। दलित समुदाय का कोई व्यक्ति यदि किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराता है तो आरोपी व्यक्ति के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज हो जाती है और बिना जाच के उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाता है। एससी/एसटी एक्ट में दर्ज मामलों की सुनवाई भी स्पेशल कोर्ट में होती है। इस एक्ट में अग्रिम जमानत मिलने का प्रावधान नहीं है। इन मामलों में जमानत केवल उच्च न्यायालय से मिलती है।

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