डेंगू के बाबत सरकार की रिपोर्ट स्पष्ट नहीं : हाई कोर्ट

कोलकाता : डेंगू के बाबत सरकार की तरफ से एफिडेविट की शक्ल में पेश की गई रिपोर्ट स्पष्ट नहीं है। इस बाबत दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवायी करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्या और जस्टिस अरिजीत बनर्जी के डिविजन बेंच ने यह टिप्पणी की। इसके साथ ही एडवोकेट जनरल को इस एफिडेविट के पक्ष में दस्तावेजी सबूत पेश करने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि मौत तो मौत होती है, तो फिर सरकारी अस्पतालों में मरने वालों का ही आंकड़ा क्यों दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि मौत के आंकड़ों में अंतर्विरोध क्यों है। पीटिशनरों की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेटों की बहस मंगलवार को पूरी हो गई। इसके बाद चीफ जस्टिस ने एडवोकेट जनरल (एजी) किशोर दत्त को कहा कि वे बुधवार को दस्तावेजी सबूत पेश करते हुए सरकार का पक्ष प्रस्तुत करें। जवाब में एजी ने कहा कि उन्हें सरकार का पक्ष रखने दिया जाए और बुधवार को वे दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर पाएंगे। एफिडेविट में जो दावा किया गया है सरकार को उसी बाबत सबूत पेश करना है। बहरहाल इस मामले से जुड़े एक एडवोकेट के व्यस्त होने के कारण अगली सुनवायी के लिए वृहस्पतिवार का दिन तय किया गया। इसके साथ ही जस्टिस अरिजीत बनर्जी ने कहा कि ठीक है वे वृहस्पतिवार को अंतरिम आदेश दे देंगे, लेकिन डेंगू से कितने लोगों की मौत हुई है इसका आंकड़ा जरूर पेश करें। दरअसल डेंगू से हुई मौत के मामले में विवादास्पद तथ्य पेश किए गए हैं। जैसे नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम) के मुताबिक चार अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल में डेंगू से 19 लोगों की मौत हुई थी और 10,663 लोग इसके शिकार हुए थे। दूसरी तरफ सरकार की तरफ से नौ नवंबर को दाखिल की गई एफिडेविट में कहा गया है कि डेंगू से कुल 19 लोगों की मौत हुई है और 16 हजार से ‌अधिक लोग इसके शिकार हुए हैं। चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या चार अक्टूबर से नौ नवंबर के बीच कोई मौत नहीं हुई है। यहां गौरतलब है कि एडवोकेट अनिन्द्य सुंदर दास, कांग्रेस के अधीर चौधरी और भाजपा की तरफ से दायर पीआईएल पर बहस करते हुए एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या, आशिष सान्याल और पार्थो घोष ने आरोप लगाया कि सरकार डेंगू से मरने वालों के आंकड़े को छुपा रही है। इस मौके पर हुई गर्मागर्म बहस में दखल देते हुए जस्टिस अरिजीत बनर्जी ने कहा : ‘यह कोई एक दूसरे के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं है, बल्कि इसका सरोकार हम सभी से है, लिहाजा सारे तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।’ इस मौके पर पीआईएल के पक्ष के पीटिशनरों ने कहा कि डॉक्टरों पर डेंगू से मौत नहीं होने का लिखने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इसी वजह से एक डॉक्टर का निलंबन भी हुआ है। इसके साथ ही यह दबाव भी डाला जा रहा है ‌कि डेंगू की जांच के लिए आरडीटी टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए। जबकि डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एलिजा टेस्ट ही मान्य विधि है। बहरहाल इस मामले पर डिविजन बेंच वृहस्पतिवार को अंतरिम आदेश देगा।

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