बेंगलूरू के दिल ने झारखंड के दिलचांद को दिया नया जीवन

कोलकाता : बेंगलूरू से करीब 1900 किलोमीटर की दूरी तय कर वहां के एक युवक का दिल कोलकाता पहुंचा। यहां झारखंड के एक एक मरीज के बीमार दिल को बदलकर उसे नवजीवन मिला। राज्य में पहली बार कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में यह दुर्लभ हृदय प्रत्यारोपण किया गया। डॉक्टरों का मानना है कि यह पूर्वी भारत में पहला हृदय प्रत्यारोपण है। सोमवार की सुबह 8.15 बजे के विमान से बेंगलूरू से दिल को कोलकाता के दमदम हवाई अड्डे पर करीब 10.45 बजे उतारा गया। एयरपोर्ट से अस्पताल तक की 18 किमी की दूरी को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए मात्र 18 मिनट में तय कर लिया गया। उल्लेखनीय है कि बेंगलूरू में दुर्घटना के शिकार युवक के स्पर्श अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सोमवार की सुबह करीब 7 बजे उसके दिल को हार्वेस्ट किया गया। इसके बाद बेंगलूरू से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से एयरपोर्ट तक दिल को लाया गया। इसके बाद दमदम हवाई अड्डे से कोलकाता के ईएम बाइपास स्थित फोर्टिस अस्पताल में दिल को पहुंचाकर झारखंड के मरीज को नया दिल प्रत्यारोपित किया गया।एक सड़क दुर्घटना में बेंगलुरु के वरुण बीके (21) की मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने उसे शनिवार को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद मृतक के परिवार के सदस्यों ने हार्ट दान करने की इच्छा जताई थी। अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत चेन्नई के मल्हार फोर्टिस अस्पताल से संपर्क किया, लेकिन उस वक्त वहां कोई जरूरतमंद नहीं था। इसके बाद कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल से संपर्क साधा गया। यहां भर्ती दिलचांद सिंह गंभीर रूप से डाईलेटेड कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित था। वह 2017 के जनवरी से हॉर्ट का इंतजार कर रहा है। रविवार को ही उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप मैच कर गया।इस दौरान डॉ.अदिति किशोर सरकार, राज्य के स्वास्थ्य विभाग में अतिरक्ति स्वास्थ्य सेवा निदेशक (एडीएचएस) व अंग प्रतिस्थापन के नोडल ऑफिसर की भी सराहनीय भूमिका रही। उन्होंने कहा कि यह कोलकाता के लिए गर्व की बात है।सुबह करीब 11.10 बजे हृदय प्रत्यारोपण की सर्जरी शुरू हुई। इसके पूरा होने में तकरीबन 4 घंटे का समय लगा। 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने सर्जरी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कई अन्य डॉक्टर भी इसमें शामिल थे।
डॉ.तापस राय चौधरी, डॉ.के.एम.मंदाना, डॉ.के.आर.बालाकृष्णन, डॉ.सैकत बंद्योपाध्याय, डॉ.सुरेश राव, डॉ.अराफात सर्जरी में शामिल थे। डॉ.सुनील आकाश चौधरी ने बेंगलूरू में युवक के दिल को हार्वेस्ट किया।डॉक्टरों ने सर्जरी को सफल बताया। ऐसी सर्जरी में सफलता दर 85 से 90 प्रतिशत है। डॉक्टरों ने कहा कि 96 घण्टे काफी महत्वपूर्ण है। इसके बाद अगली बुलेटिन जारी की जाएगी। मरीज के स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की टीम नजर रख रही है।डॉक्टरों की टीम ने बताया कि दरअसल बंगाल में ही 35 हजार लोगों की मौत हृदयाघात से होती है। हालांकि लोगों में हॉर्ट ट्रांसप्लांट को दान करने के मामले में जागरूकता की कमी है। इस कारण पहली बार पूर्वी भारत में पहला हृदय प्रत्यारोपण किया गया।

पूर्वी भारत में कोलकाता में पहले हॉर्ट ट्रांसप्लांट के लिए बनाया गया ग्रीन कोरिडोर
18 किमी. की दूरी तय हुई 18 मिनट में, जबकि अमूमन लगते हैं सवा घंटे

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