हैदराबाद विस्फोट कांड के मुख्य अभियुक्त को मिली फांसी

बनगांव : हैदराबाद विस्फोट कांड से जुड़े लश्कर आतंकी शेख अब्दुल्ला नईम उर्फ शेख समीर को बनगांव फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सेशन जज विनय कुमार पाठक ने शनिवार को फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। लंबी पूछताछ के बाद उसे मंगलवार को ही दोषी करार दिया गया था। लश्कर-ए-तैयबा ने साल 2007 में कश्मी की सेना छावनी, 2016 में उरी में हमले की योजना बनायी थी। उसी समय एक सुसाइड बॉम्बर और 2 आतंकियों को शेख समीर ने बनगांव सीमांत के चोरी के रास्ते से देश में प्रवेश कराया था। आतंकियों ने आरडीएक्स की मदद से जवानों की एक ट्रेन उड़ाने की योजना बनायी थी लेकिन हमले के पहले ही पेट्रापोल सीमांत से बीएसएफ के जवानों ने उन्हें पकड़ लिया था। मामले की जांच की जिम्मेदारी सीआई़डी को सौपी गयी। पकड़े गये अभियुक्तों से पूछताछ कर कोलकाता में लश्कर के गुप्त अड्डे का पता मिला। इस अड्डे से बड़ी संख्या में विस्फोटक बरामद हुए। देशद्रोहिता के अपराध में लश्कर की टीम के 3 आतंकियों को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई लेकिन सजा की सुनवाई होने से पहले ही पुलिस की आखों में धूल झोंककर आतंकी फरार हो गये। जिनमें शेख समीर भी शामिल था। शेख समीर के खिलाफ सिर्फ यह मामला ही नहीं बल्कि वह देश के और 2 बड़े आतंकी मामलों का मोस्ट वांटेड है। सीआईडी सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र के औरंगाबाद का रहने वाला समीर शेख इंजीनियरिंग का छात्र था। साल 2007 में पेट्रापोल सीमांत इलाके से 3 लश्कर आतंकी मोहम्मद युनूस (60), अब्दुल्लाह (34), मुजफ्फर अहमद राठौर (32) के साथ समीर को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद इन बंगलुरू में इन चारों आतंकियों की ब्रेन मैपिंग, पॉलिग्राफ औ्र नारको एनालिसिस टेस्ट किया गया। वहीं जांच करने वाले अधिकारियों के सामने समीर ने अपना सारा गुनाह कबूल कर लिया। सूत्रों के मुताबिक समीर ने जांच अधिकारियों के सामने स्वीकार किया कि वह लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर है। हैदराबाद के मक्का मस्जिद में विस्फोट का षड़यंत्र समीर ने ही रचा था। लश्कर के आतंकी किस तरह देश में घुसेंगे, कहां विस्फोटक जमा किये जायेंगे, कैसे हमला किया जायेगा ये सारी योजनाएं समीर ही बनाता था। एंटी टेररिस्ट स्क्वायड सूत्रों के मुताबिक साल 2006 में पाकिस्तान से आये आरडीएक्स, एके 47 राइफल और कार्तूस औरंगाबाद से जब्त किये गये थे। उसके पीछे भी समीर की भूमिका सक्रिय था। साल 2014 के 25 अगस्त को उसी मामले में पेश होने के लिए ही हावड़ा-मुंबई एक्सप्रेस से उसे मुंबई के एमसीओसीए कोर्ट ले जाया जा रहा था। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्टेशन के पास चलती ट्रेन से लग कूदकर फरार हो गया। करीब 3 साल तक फरार रहने के बाद फिर वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया। मंगलवार को बनगांव अदालत ने उसे दोषी करार दिया और शनिवार को उसे फांसी की सजा सुनाई गयी।




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