आधुनिक दन्त चिकित्सा को लेकर जानकारी जरूरी : सिन्हा

भारत का दंत आरोग्य केवल ग्रामीण समुदाय के दंत स्वास्थ्य पर निर्भर करता है और इसके लिए हमें इस दिशा में आधुनिक दंतचिकित्सा एवं उसकी जानकारी पर जोर देना होगा। यह नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा ने नेशनल ओरल हेल्थकेर सुश्रुता अवार्ड्स समारोह में कही। इस मौके पर प्रधान मंत्री द्वारा स्वास्थ्य सेवा में लोगों तक सस्ती सेवा मुहैया कराने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन की घोषणा की गई है। सिन्हा ने कहा की ऐसी सुविधा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन अन्य संस्थाओ को भी इसके लिए आगे आना होगा। दंत चिकित्सा क्षेत्र में आईडीएके योगदानको सराहते हुए उन्होंने कहा की ये एक अच्छी मिसाल है जो भारत के स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्योमे लम्बे अरसे तक चलती रहेगी। दंत चिकित्सा के लिए ज्यादातर लोगो में दुर्लक्ष पाया जाता है, पर आईडीए इसके बारे में जानकारी फैलाकर जो कार्य कर रही है उसकी मुझे ख़ुशी है।

सिन्हा ने दंत चिकित्सा में अच्छा योगदान देवे वाले 16 लोगो को डॉ. विश्वास पुराणिक (अध्यक्ष – आईडीए), डॉ. एम सी मोहन (चेयरमैन- आईडीए), डॉ. अशोक धोबले (मानद सचिव – आईडीए) और अन्य मान्यवर लोगो की उपस्थिति मे वितरित किए। अवार्ड्स पाने वालों में निवृत लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंघ (संरक्षण क्षेत्र में दंत चिकित्सा में योगदान के लिए) डॉ. महेश नाथ (समुदायको सेवा देनेवाले निजी व्यक्ति), कैंसर पेशेंट्स ऐड एसोसिएशन (बिन-सरकारी संस्था) और डीपीआई (बेस्ट डेंटल मैन्युफैक्चरर) के अलावा डॉ. हरिप्रकाश, डॉ. केकी मिस्त्री और डॉ प्रदीप जयना को लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड्स, डॉ. युएस कृष्ण नायक के नेतृत्व में विशेष योगदान देने वाली एबी शेट्टी मेमोरियल इंस्टिट्यूट, डॉ. महेश वर्मा के नेतृत्व में कार्य करने वाली मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेंटल साइंसेज़ शामिल थे।

दंत कैन्सर को लेकर जागरूकता फ़ैलाने के लिए डॉ. रवि कन्नन, महिला दंतचिकित्सक डॉ. नीलिमा मलिक, सामुदायिक सेवा के लिए डॉ. वी के शाह, तम्बाकू नियंत्रणके लिए डॉ. पी सी गुप्ता, डॉ. शंकर ऐयर (बिन निवासी भारतीय), जागतिक दंत चिकित्सा के लिए डॉ. टिन चुन वोंग और कला एवं मनोरंजन क्षेत्रमे विशेष योगदान देवे वाले डॉ. मेइयंग चांग भी अवार्ड्स पाने वालों में थे। सिन्हा ने कहा की दंत चिकित्सा को लोग गंभीर रूप से नहीं लेने की वजह से उनके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते है जो उनकी कार्यशक्ति को नुकसान करता है। उनकी जानकारी के मुताबिक देश में 309 डेंटल कॉलेज हैं, जहांसे सालाना 25 000 स्नातक सेवा मे जुड़ते है, लेकिन मुलभुत सुविधा के अभाव और जानकारी के दुर्भाव को लेकर मुश्किलें खड़ी होती है। दंत चिकित्सा के लिए आधुनिक तकनीक की उपलब्धि, सहजता और सामर्थ्य भारतके लिए गंभीर परेशानी है और इसके लिए आईडीए और स्वास्थ्य मंत्रालयको सहायक बनने वाले किसी भी सुझाव का में स्वागत करूँगा।

डॉ. अशोक धोबले (मानद सचिव- आईडीए) ने बताया की नेशनल ओरल हेल्थकेर सुश्रुता अवार्ड्सके जरिये आईडीए इस क्षेत्रमे उच्चस्तर का योगदान देने वालो को सम्मानित कर के इस क्षेत्र में लोगो की रूचि और योगदान बढे इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है। भारतरत्न स्व. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा नेशनल ओरल हेल्थकेर सुश्रुता अवार्ड्स की शुरुआत की गई थी। पिछले साल इस अवार्ड्सका वितरण कुटुंब कल्याण मंत्री डॉ. जे पी नड्डा ने किया था।

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