हंगामे के बीच सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार

नई दिल्लीः संसद का मॉनसून सत्र बुधवार से शुरू हुआ है, और पहले ही दिन सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। हंगामें के बीच विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ लोकसभा में रखे गए अविश्वास प्रस्ताव को स्पीकर सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया है। अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में शुक्रवार को चर्चा होगी। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण सदन में लटके महत्वपूर्ण बिल हैं जिसे पास करवाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
मॉब लिंचिंग मुद्दो पर विरोध
बुधवार को समाजवादी पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी के सांसदों ने लोकसभा में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं और आंध्र प्रदेश के लिए स्पेशल स्टेटस की मांग समेत कई मुद्दों पर विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस के सांसद ज्योदिरादित्य सिंधिया ने कहा जो सरकार किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रही है, जिस सरकार में हर रोज महिलाओं से रेप की वारदातें हो रही हैं। हम उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखते हैं।
श्रीनिवास ही अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे
टीडीपी के श्रीनिवास ने एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कहा कि वह अगले दो-तीन दिन में इसपर बहस की तारीख तय करेंगी। स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करनेवाले उन सभी सदस्यों का नाम लेते हुए कहा कि टीडीपी के श्रीनिवास ही अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे क्योंकि लॉटरी से उनका नाम ही निकला है।
बता दें कि टीडीपी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने के विरोध में इसी साल मार्च में एनडीए से अलग हो गई थी। श्रीनिवास ने जीरो ऑवर में प्रस्ताव पेश किया और स्पीकर ने इसे मान लिया। टीडीपी के सदस्यों ने बजट सत्र के दौरान भी अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था लेकिन स्पीकर ने उसे खारिज कर दिया था।

लंबित पड़े हैं अहम बिल
18 जुलाई से शुरु हुआ संसद का मानसून सत्र सरकार के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि ये मानसून सत्र मोदी सरकार के लिए आखिरी सत्र साबित हो सकता है। केंद्र सरकार के कार्यकाल के अब केवल 10 महीने ही शेष हैं। इस सत्र में कई ऐसे बिल लंबित हैं, जिन्हें मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के तुरंत बाद लेकर आई थी, लेकिन उन्हें पारित नहीं करवा पाई। हालांकि सरकार ने लंबित बिलों में से 12 बिल बहुमत वाले सदन लोकसभा में पारित करा लिए हैं, लेकिन वे राज्यसभा में अटके हुए हैं। कई बिल लोकसभा में अटके हुए हैं। जिनमें तीन तलाक और मासूमों से रेप पर फांसी के लिए आपराधिक कानून संशोधन बिल अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
एक नजर अहम बिलों की सूची परः
भगोड़ा आर्थिक अपराध अध्यादेश 2018,
आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018,
उच्च न्यायालयों की कमर्शियल अदालतें, कमर्शियल डिविजन्स और कमर्शियल अपीलीय डिविजन्स (संशोधन) अध्यादेश 2018,
होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश 2018,
राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश 2018
इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2018 शामिल हैं।
इन विधेयकों पर भी होगी चर्चा:
सत्र के दौरान चर्चा के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, महत्वपूर्ण बंदरगाह प्राधिकार विधेयक 2016,
राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक 2017
भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन विधेयक 2013 को भी एजेंडे में रखा गया है।
सार्वजनिक परिसर अनधिकृत कब्जा को हटाने संबंधी संशोधन विधेयक 2017
दंत चिकित्सक संशोधन विधेयक 2017
जन प्रतिनिधि संशोधन विधेयक 2017
भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन विधेयक 19 अगस्त 2013 को राज्यसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे प्रवर समिति को भेजा गया जिसने 12 अगस्त 2016 को राज्यसभा में रिपोर्ट पेश की थी। यह विधेयक राज्यसभा में पास होने के बाद लोकसभा में पेश किया जा सकता है।

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