सुप्रीम कोर्ट ने 377 रद्द किए जाने पर फिल्‍मी इंडस्ट्री हुई खुश, सोनम और चड्ढा ने कही ये बात

नईदिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समलैंगिक समाज में खुशी की लहर है। देश के अलग अलग हिस्सों में इस समाज से जुड़े लोग अपनी भावना का उद्दगार जाहिर कर रहे हैं। एक दूसरे के साथ खुशियों को साझा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक जगत से मिली जुली प्रतिक्रिया आई हैं तो फिल्मी समाज ने अपने अंदाज में संविधान पीठ के फैसले की व्याख्या कर रहा है। इस कड़ी में करन जौहर का ट्वीट चर्चा में छाया हुआ है।

करन जौहर : करन ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ऐतिहासिक फैसला, आज मुझे गर्व महसूस हो रहा है। समलैंगिकता को अपराध मुक्त करना और सेक्‍शन 377 को खत्म करना एक बड़ी जीत है। देश को उसकी ऑक्सीजन मिल गई।

सोनम कपूर : सोनम कपूर ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, मेरी आंखों में एलजीबीटी कम्यूनिटी के लिए खुशी के आंसू हैं। अब कोई लेबल नहीं होगा। हम एक आदर्श दुनिया में रह सकेंगे। ये वो देश है जिसे हम प्यार करते हैं।

एक्‍ट्रेस ऋचा चड्ढा : ऋचा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा ये बादलों के बीच इंद्रधनुष निकलने की तरह है। ये एक जीत है।

आयुष्मान खुराना : सेक्‍शन 377 ये एक नई शनशाइन की तरह है।

डायरेक्टर हंसल मेहता : ने लिखा, एक नई शुरुआत, सुप्रीम कोर्ट ने वो कर दिखाया जो करने में संसद नाकाम रही। अब अपने व्यवहार में बदलाव की जरूरत है। ये दर्शाता है कि ये एक नई शुरुआत है।

टीवी एक्ट्रेस श्रुति सेठ : ने लिखा, ऐसा लग रहा है कि 21वीं सदी में जी रहूं हूं। समलैंगिकता अब अपराध नहीं है।
स्वरा भाष्कर : इस फैसले का दूरगामी असर पड़ेगा।

किन देशों में समलैंगिकता अपराध
यहां हम उन देशों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जहां समलैंगिकता को अपराध माना जाता है। कई देशों में तो इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान भी है। 72 देशों में गुनाह है ‘समलैंगिकता’ उतार दिया जाता है मौत के घाट। बता दें, साल 2017 में जारी हुई इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांस एंड इंटरसेक्स एसोसिएशन (आईएलजीए) की रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया के 72 देशों में समलैंगिक संबंध अभी भी अपराध की श्रेणी में हैं। इनमें से 45 देशों में महिलाओं के बीच के यौन संबंधों को गैर कानूनी करार दिया गया था।

71 देशों में समलैंगिकता प्रकृति के खिलाफ माना जाता है
वहीं समलैंगिकता को लिए दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया सबसे कठोर दृष्टिकोण रखता है। जबकि पश्चिमी यूरोप और पश्चिमी गोलार्ध इसे लेकर सबसे सहिष्णु हैं। समान लिंग संबंधों को अभी भी 71 देशों में ‘प्रकृति के खिलाफ’ माना जाता है और वहां कानून के तहत जेल की सजा हो सकती है। वहीं सुडान, ईरान, सऊदी अरब, यमन में समलैंगिक रिश्ता बनाने के लिए मौत की सजा दी जाती है। सोमालिया और नाइजीरिया के कुछ हिस्सों में भी इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है।

इन देशों में है मान्य है समलैंगिकता-
बेल्जियम, कनाडा, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, डेनमार्क, उरुग्वे, न्यूजीलैंड, फ्रांस, ब्राजील, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, लग्जमबर्ग, फिनलैंड, आयरलैंड, ग्रीनलैंड, कोलंबिया, जर्मनी, माल्टा भी समलैंगिक शादियों को मान्यता दे चुका है। इसमें नीदरलैंड ने सबसे पहले दिसंबर 2000 में समलैंगिक शादियों को कानूनी तौर से सही करार दिया था। 2015 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादियों को वैध करार दिया था. हालांकि, 2001 तक 57 फीसदी अमेरिकी लोग इसका विरोध करते थे।

क्या है धारा 377
धारा-377 इस देश में अंग्रेजों ने 1861 में लागू किया था. इस कानून के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध (जैसे- अगर कोई व्यक्ति किसी महिला, पुरुष अथवा जानवर) के साथ अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रकैद या दस साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। साल 1860 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने भारतीय दंड संहिता में धारा 377 को शामिल किया और उसी वक्त इसे भारत में लागू कर दिया गया। 1861 में डेथ पेनाल्टी का प्रावधान भी हटा दिया गया। 1861 में जब लॉर्ड मेकाले ने इंडियन पीनल कोड यानी आईपीसी ड्राफ्ट किया तो उसमें इस अपराध के लिए धारा 377 का प्रावधान किया गया।



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