2032 में ओलंपिक की मेजबानी कर सकता है भारत!

नई दिल्लीः भारतीय ओलंपिक संघ 2032 ओलंपिक की मेजबानी को लेकर बेहद गंभीर है जिसके लिए उसने इस खेल महाकुंभ के आयोजन के लिये दावेदारी पेश करने की आधिकारिक तौर पर दिलचस्पी दिखाई है। आईओए सरकार से संपर्क करके इसके लिए समर्थन भी मांगेगा। इससे पहले भारत दौरे पर आये अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के प्रमुख थाॅमस बाक को आईओए के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने कहा था कि भारत 2032 ओलंपिक की दावेदारी करने के बारे में विचार कर रहा है।
सौंप चुका है पत्र

आईओए पहले ही 2032 ओलंपिक की मेजबानी की बोली लगाने के लिए अपनी इच्छा से संबंधित पत्र आईओसी को सौंप चुका है। इसके बाद आईओए के महासचिव राजीव मेहता ने जैक्लीन बार्रेट की अध्यक्षता वाली आईओए की तीन सदस्यीय बोली समिति से इस महीने की शुरुआत में मुलाकात की थी। जैक्लीन ओलंपिक खेलों की एसोसिएट निदेशक (ओलंपिक दावेदारी) है। मेहता ने कहा ‘हम 2032 ओलंपिक की दावेदारी को लेकर बेहद गंभीर है। इसलिए हम पहले ही 2032 ओलंपिक की मेजबानी की बोली में अपनी दिलचस्पी से संबंधित पत्र आईओसी को सौंप चुके हैं। आईओसी की बोली समिति के सदस्यों से मेरी मुलाकात हुई। उन्होंने हमारे फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को काफी पहले ही ओलंपिक की मेजबानी करनी चाहिये थी।’
दिल्ली और मुंबई का प्रस्ताव
आईओए के शीर्ष अधिकारियों के दिमाग में मेजबानी के लिये दिल्ली और मुंबई का नाम है पर दूसरे शहरों को नकारा नहीं जा सकता। यह पहली बार है जब आईओए ने आधिकारिक रूप से ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा ‘यह सिर्फ पहला चरण है, जब कोई देश ओलंपिक की बोली के लिए इच्छा व्यक्त करता है और बाद के चरणों में मेजबान शहर या शहरों के नाम की घोषणा बोली में करता है। इससे पहले भारत ने कभी ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए इच्छा नहीं जताई थी।’सरकार का समर्थन जरूरी
आईओए बोली प्रक्रिया में शामिल होने योजना बना रहा है और 22 दिसंबर को होने वाले आगामी आम सभा में इस मुद्दे पर सरकार से समर्थन मंगाने का प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है। मेहता ने कहा कि आम बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद हम बोली की समर्थन के लिए सरकार से संपर्क करेंगे। बोली प्रक्रिया 2022 में शुरू होगी लेकिन उससे पहले हमें केन्द्र सरकार से समर्थन लेना होगा। उन्होंने कहा कि हमें केन्द्र सरकार, मेजबानी के लिए चयनित राज्य सरकार और नेता प्रतिपक्ष का भी समर्थन पत्र चाहिए। मेहता ने कहा कि हमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों से गारंटी भी चाहिए लेकिन यह सब तभी शुरू होगा जब सरकार इस बोली का समर्थन करेगी। सरकार का रुख इस मामले पर ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं रहा है। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस ओर इशारा किया था कि भारत इतना बड़ा आयोजन करने की जगह ओलंपिक में पदक जीतने के लिए आधारभूत संरचनाओं पर ज्यादा खर्च करना चाहेगा।


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