जम्मू-कश्मीर के लिए अलग संविधान की व्यवस्था एक गलती थीः डोभाल

नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने अपने बयान से जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 35ए पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। डोभाल ने ‘कश्मीर सभी के लिए’ विचार पर जोर दिया है। डोभाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए अलग संविधान की व्यवस्था संभवत: एक ‘गलती’ थी। डोभाल के इस बयान की पीडीपी ने निंदा की है। एनएसए ने यह बात आरएनपी सिंह की पुस्तक ‘युनिफायर ऑफ मॉडर्न इंडिया’ के विमोचन के मौके पर कही। सिंह की यह पुस्तक सरदार पटेल पर केंद्रित है। इस मौके पर सरदार पटेल के योगदान पर डोभाल ने कहा ‘देश की संप्रभुता यदि अलग-अलग क्षेत्रों पर कायम नहीं हुई होती तो हर जगह अराजक स्थिति बन गई होती।’

पुस्तक में इस बात का उल्लेख
इसी क्रम में डोभाल ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा ‘शायद जम्मू-कश्मीर में संविधान थोड़ बदले हुए रूप में लागू किया गया और जम्मू-कश्मीर का संविधान आज भी जारी है। जो कि संभवत: एक गलती थी।’ डोभाल ने कहा ‘मैं समझता हूं कि आरपीएन सिंह ने अपनी इस पुस्तक में इसी बात का उल्लेख किया है।’

विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की
डोभाल के इस बयान की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। पीडीपी के नेता रफी अहमद मीर ने कहा ‘ये बहुत ही गैरजिम्मेदार बयान है। मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के बारे में जम्मू-कश्मीर की जनता जो सोचती है उसके बारे में या तो उन्हें जानकारी नहीं है या वह पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। हम अजीत डोभाल के बयान की निंदा करते हैं।’

सुनवाई होने वाली है
सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 35ए की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई करने वाला है। कई जनहित याचिकाओं में अनुच्छेद 35ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में कहा गया है कि यह अनुच्छेद नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन और भेदभाव करता है। जबकि भाजपा को छोड़ जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि अनुच्छेद 35 ए के साथ छेड़छाड़ हुई तो राज्य के लोग आंदोलन शुरू कर देंगे।



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