देशभक्ति, ईमानदारी और सादगी के मिशाल थे लाल बहादुर शास्‍त्री

नयी दिल्ली : जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की आज 53वीं पुण्यतिथि है। शास्‍त्री जी 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। देश में बहुत कम लोग ऐसे हुए हैं, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से अपने जीवन की शुरुआत कर देश के सबसे बड़े पद पर पहुंचे। उन्हीं में से एक थे लाल बहादुर शास्‍त्री। भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान शास्त्री 9 साल तक जेल में रहें। असहयोग आंदोलन के लिए पहली बार वह 17 साल की उम्र में जेल गए, लेकिन बालिग नही होने की वजह से उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद वह सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए। 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी वह जेल में रहे। इस तरह कुल नौ साल वह जेल में रहे। शास्त्री जी जात-पात के सख्त खिलाफ थे। तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया। शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी। वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी का दहेज लिया। शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिए पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्हें साल 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
नारा जय जवान जय किसान की कहानी
1964 में जब वह प्रधानमंत्री बने, तब देश खाने की चीजें आयात करता था। उस वक्त देश पीएल-480 स्कीम के तहत नॉर्थ अमेरिका पर अनाज के लिए निर्भर था। 1965 में पाकिस्तान से जंग के दौरान देश में भयंकर सूखा पड़ा। तब के हालात देखते हुए उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। इन्हीं हालात से उन्होंने हमें जय जवान जय किसान का नारा दिया। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के तौर पर सबसे पहले उन्होंने ही इस इंडस्ट्री में महिलाओं को बतौर कंडक्टर लाने की शुरुआत की। यही नहीं प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उन्होंने लाठीचार्ज की बजाय पानी की बौछार का सुझाव दिया था।
परिवार ने जहर देने का लगाया था आरोप
लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने आरोप लगाया था कि उनके पति को जहर देकर मारा गया। उनके बेटे सुनील शास्त्री ने कहा था कि उनके पिता की बॉडी पर नीले निशान थे। साथ ही उनके शरीर पर कुछ कट भी थे। सोवियत संघ के ताशकंद में 10 जनवरी, 1966 को भारत और पाकिस्‍तान ने एक समझौते पर दस्‍तखत किए थे। उसी रात ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था। शास्‍त्री के निधन के बाद परिजनों ने उनकी मौत पर सवाल उठाए थे। उनके बेटे अनिल शास्त्री के मुताबिक लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनका पूरा चेहरा नीला हो गया था, उनके मुंह पर सफेद धब्बे पाए गए थे। उन्‍होंने कहा था कि शास्‍त्री के पास हमेशा एक डायरी रहती थी, लेकिन वह डायरी नहीं मिली। इसके अलावा उनके पास हरदम एक थर्मस रहता था, वो भी गायब था। इसके अलावा पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ था, जिससे उनकी मौत संदेहजनक मानी जाती है।
क्‍या था ताशकंद समझौताताशकंद समझौता भारत-पाकिस्तान के बीच को हुआ एक शांति समझौता था। जिसे सोवियत संघ के प्रधानमंत्री ने आयोजित किया था। इसमें यह तय हुआ कि भारत और पाकिस्तान अपनी-अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे और अपने झगड़ों को शांतिपूर्ण ढंग से तय करेंगे। 25 फरवरी 1966 तक दोनों देश अपनी सेनाएं सीमा रेखा से पीछे हटा लेंगे। दोनों देशों के बीच आपसी हितों के मामलों में शिखर वार्ताएं तथा अन्य स्तरों पर वार्ताएं जारी रहेंगी। भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच हुए ताशकंद समझौता के तहत दोनों देशों को जीती हुई भूमि लौटानी पड़ी। यह करार का अहम हिस्‍सा था। आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों तथा संचार संबंधों की फिर से स्थापना तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान फिर से शुरू करने पर विचार किया जाएगा। ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न की जाएंगी कि लोगों का निर्गमन बंद हो। शरणार्थियों की समस्याओं तथा अवैध प्रवासी प्रश्न पर विचार-विमर्श जारी रखा जाएगा। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध फिर से स्थापित किए जाएंगे।

गरीबी और मुश्किलों से भरा था बचपन
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था। बचपन से ही शास्त्री को काफी गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई जगह इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पैसे नहीं होने पर वे तैरकर नदी पार कर स्कूल जाया करते थे।


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