रिपोर्टः 2016 में चैरिटी होम में 108 गर्भवती महिलाएं थी, संस्था ने सिर्फ 10 बच्चों को एडॉप्शन के लिए पेश किया

2014 में आयी थी पहली संस्‍‌था के खिलाफ पहली शिकायत

रांचीः मिशनरीज ऑफ चैरिटीज के निर्मल हृदय आश्रम से बच्चा बिक्री मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में एक और खुलासा हुआ है कि आश्रम से नवजातों की बिक्री की बात पहली बार सामने नहीं आ रही है। 2016 में विशेष शाखा ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि ईस्ट जेल रोड स्थित निर्मल हृदय से बच्चों की बिक्री की जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया था कि जांच के दौरान पाया गया कि 2016 में इस चैरिटी होम में 108 गर्भवती महिलाएं थी, जबकि उस वर्ष संस्था ने सिर्फ 10 बच्चों को गोद लेने के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया। बाकी 98 बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया। यही नहीं, 2014 में एक दंपती ने तत्कालीन सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश सिंह को शिकायत दी थी कि चैरिटी होम निर्मल हृदय और हिनू स्थित निर्मला शिशु भवन ने बच्चे के बदले पैसे मांगे हैं। अध्यक्ष ने समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग के आला अफसर से कार्रवाई में मदद मांगी तो उसने संस्‍था के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का आदेश सुना दिया। इसके बाद भी जांच के लिए 3 जनवरी 2014 को सीडब्‍ल्यूसी की टीम हिनू ‌स्थित निर्मला शिशु भवन पहुंची। यहां संचालिका सिस्टर निमा रोज ने टीम के साथ दुर्व्यवहार किया, चिल्लाने लगी, और किसी को अंदर घुसने नहीं दिया। इस हंगामे के चलते टीम को बैरंग लौटना पड़ा था। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचाए जाने के बावजूद इससे पहले संस्था के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई थी।

दूसरे राज्यों में बच्चा बेचा जाता था
स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्मल हृदय ईस्ट जेल रोड में बच्चों की बिक्री की जाती है। इसके लिए एजेंट बिन ब्याही आदिवासी गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में रहने, डिलिवरी खर्च उठाने का झांसा दे यहां लाते हैं। उन महिलाओं से अंग्रेजी में लिखे कागज पर हस्ताक्षर कराते हैं। इसमें लिखा होता है कि नवजात पर उनका कोई अधिकार नहीं होगा। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे बेच दिया जाता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि राज्य भर में संचालित संस्था के एडॉप्शन सेंटर होम्स की जांच करवाई जाए। झारखंड सरकार निर्मल हृदय को एडॉप्शन के लिए हर साल 10-15 लाख रु. अनुदान देती है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जतायी थी कि इन बच्चों को दूसरे राज्यों के दंपतियों को बेचा गया है। मालूम हो कि यह रिपोर्ट दोबारा सरकार को भेजी गई है।

तत्कालीन अध्यक्ष ने सभी अफसरों को लिखा था पत्र

सीडब्ल्यूसी रांची के तत्कालीन अध्यक्ष ने झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग के अध्यक्ष, उपायुक्त रांची, समाज कल्याण विभाग रांची, जिला जज रांची, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी रांची आदि को पत्र(क्रमांक 57/14, 4.1.14) लिख संस्था की जांच को कहा था। उन्होंने कहा था कि एडॉप्शन से संबंधित निबंधन तो है, पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में उक्त शिशु भवन का निबंधन नहीं है।
नवजातों की बिक्री का मामला सामने आने के बाद अब यहां से शेल्टर हटाकर इसे सील कर ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। वहीं, निर्मल हृदय की तरह चैरिटी होम के हिनू में चल रहे शेल्टर से भी युवतियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी सीडब्ल्यूसी कर रही है। जानकारी के अनुसार दोनों शेल्टर होम को सील किया जा सकता है। मालूम हो कि निर्मल हृदय की सिस्टर और कर्मचारी की मिलीभगत से बच्चा बेचे जाने की पुष्टि होने के बाद बुधवार को ही सील करने की कार्रवाई हो सकती थी, लेकिन यहां रह रहीं 75 साइक्लोजिकल महिलाओं के कारण कार्रवाई नहीं की गई।

जन्म देने वाली मां ने मांगा अपना बच्चा
समीरा (बदला हुआ नाम) जिसने अपने बच्चे को बेचने दिया, अब वह फिर से बच्चा लेना चाहती है। दूसरी ओर यूपी के जिस दंपती ने बच्चा खरीदा था, वह चाहते हैं कि बच्चा उसे मिले। इस मामले में सीडब्ल्यूसी की तनुश्री ने बताया कि नियमानुसार अब बच्चा दोनों को नहीं दिया जा सकता। जन्म देनेवाली अविवाहित मां ने बच्चा को बिकने के लिए दे दिया, इसलिए अब बच्चा उसे देना सही नहीं होगा। वैसे इस पर निर्णय लिया जाएगा।

रिमांड पर लेकर बच्चा बेचने के मामले में सिस्टर से होगी पूछताछ
मिशनरीज ऑफ चैरिटी ईस्ट जेल रोड रांची की सिस्टर कोनसिलिया बाखला को पुलिस ने बच्चा बेचने के आरोप में गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सिस्टर कोनसिलिया पर वहीं की एक कर्मचारी अनिमा इंदवार के साथ मिलकर चार बच्चों को बेचने का आरोप है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि दोनों ने मिलकर इसी वर्ष चार बच्चों को बेचा है। दो बच्चों को 50-50 हजार रु. में और एक को 1.20 लाख में बेचा, एक को बिना पैसे दे दिया। पुलिस ने 1.48 लाख रुपये बरामद कर लिए जो, सिस्टर द्वारा बेचने के एवज में मिले थे।

चैरिटी का मुख्यालय कोलकाता में मदर टेरेसा ने बनाया था
मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक रोमन कैथोलिक स्वयंसेवी धार्मिक संगठन है, जो विश्व-भर में मानवीय कार्यों में संलग्न है। इसकी शुरुआत एवं स्थापना, कलकत्ता की संत टेरेसा, जिन्हें मदर टेरेसा के नाम से जाना जाता है, ने १९५० में की थी। आज यह विश्व के 120 से भी अधिक देशों में विभिन्न मानवीय कार्यों में संलग्न 4500 से भी अधिक ईसाई मिशनरियों की मंडली है। इस मंडल में शामिल होने के लिए एक इच्छुक व्यक्ति को नौ वर्षों की सेवा और परिक्षण के बाद, सारे ईसाई धार्मिक मूल्यों पर खरा उतार कर इस संगठन के विभिन्न कार्यों में अपनी सेवा देने के बाद ही शामिल किया जाता है। सदस्यों को चार प्राण पवित्रता, दरिद्रता, आज्ञाकारिता और चौथा प्राण यह की वे तहे दिल से गरीब से गरीब इंसान की सेवा में अपना जीवन व्यतीत करेंगे।
इस मंडली के मिशनरी विश्व भर में, गरीब, बीमार, शोषित और वंचित लोगों की सेवा और सहायता में अपना योगदान देते हैं, तथा शरणार्थियों, अनाथों, दिव्यांजनों, युद्धपीड़ितों, वयस्कों और एड्स तथा अन्य घातक रोगों से पीड़ित लोगों की सेवा करते हैं। इसके अलावा वे अनाथ और बेघर बच्चों को शिक्षा एयर भोजन भी प्रदान करते हैं। साथ ही वे अनेक अनाथआश्रम, वृद्धाश्रम और अस्पताल भी प्रबंधित करते हैं। यह सारी सेवाएँ, निःशुल्क, और लाभार्थी के धर्म से बेपरवाह किया जाता है। इस संस्‍थान का मुख्यालय कोलकाता है।

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