योगी ने दिया आदेश, सीबीआई करेगी देवरिया बालिका गृह कांड की जांच

लखनऊः योगी सरकार ने देवरिया में नारी संरक्षण गृह में चल रहे सेक्स रैकेट मामले की सीबीआई जांच कराने का आदेश दिया है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने एडीजी क्राइम के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) शामिल किया गया है। सरकार ने एसटीएफ को एसआइटी की मदद करने के निर्देश दिए हैं। देवरिया के डीएम रहे सुजीत कुमार को लापरवाही के मामले में आरोप पत्र दिया गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी और प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी को निलंबित करते हुए उन्हें भी चार्जशीट दे दी गई है। देवरिया कांड की जांच कर रही महिला कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी महिला हेल्पलाइन अंजू गुप्ता की टीम ने बालिकाओं के बयान लेने के बाद मंगलवार शाम अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी। रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार करने के बाद रात साढ़े नौ बजे प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देवरिया मामले में बालिकाओं के बयान बेहद गंभीर हैं। इन्हीं बयानों को देखते हुए इस मामले की सीबीआइ जांच कराना बेहद जरूरी है।
एसआइटी जांच में करेगी मदद
उन्होंने बताया कि मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण समाज सेवा संस्थान वर्ष 2009 से संचालित हो रहा था। सपा-बसपा का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में इस संस्था को काफी बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों के इस पाप को देखते हुए इस संस्था के सभी कामों की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी शामिल होंगे किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने इसकी सीबीआइ जांच कराने का फैसला किया है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने कहा कि एसआइटी का नेतृत्व एडीजी क्राइम संजय सिंघल करेंगे। इसमें दो महिला अधिकारी एसपी ईओडब्ल्यू राकेश पुष्कर व एसपी पीटीसी मेरठ पूनम को शामिल किया गया है। एसटीएफ को भी एसआइटी की मदद करने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि देवरिया की बाल कल्याण समिति को बड़ी लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया गया है। समिति का गठन भी वर्ष 2015 में हुआ था। इस पर संरक्षण गृह के निरीक्षण की जिम्मेदारी थी लेकिन इसने भारी लापरवाही बरती।
सीएम ने देवरिया पुलिस की भी करायेगी जांच
सीएम ने देवरिया पुलिस की भूमिका की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्था के खिलाफ 30 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की जांच एडीजी गोरखपुर दावा शेरपा को सौंपी गई है। सीएम ने बताया कि संरक्षण गृह की बालिकाओं को वाराणसी स्थित राजकीय बालिका संरक्षण गृह में शिफ्ट किया गया है। बालकों को भी सुरक्षित बाल संरक्षण गृह में भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने देवरिया कांड को दुर्भाग्यपूर्ण बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवरिया की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी गंभीरता को देखते हुए सोमवार को ही एक बैठक की गई थी। इसमें जांच समिति बनाकर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। साथ ही डीएम को तत्काल हटा दिया गया था। यह प्रकरण हमारी सरकार सबके सामने लेकर आई है। सचल पालना घर योजना की सीबीआइ जांच में देवरिया की इस संस्था पर कई तरह की आर्थिक अनियमितताएं मिली थीं। इसी के बाद जून 2017 में ही हमारी सरकार ने इस संस्था की मान्यता समाप्त कर बंद करने के आदेश दिए थे।

क्या अब तक हुई कार्रवाई
डीएम सुजीत कुमार हटाए गए, चार्जशीट दी, पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पाण्डेय निलंबित, चार्जशीट, प्रभारी डीपीओ अनूप सिंह व नीरज कुमार को भी चार्जशीट, बाल कल्याण समिति निलंबित
जांच में कई बड़े अधिकारियों के भी चेहरे होंगे बेनकाब
देवरिया में बालिका गृह से सेक्स रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद शासन गंभीर है। मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआइ से कराने की बात कही है। इसकी सूचना आने के बाद देवरिया के कुछ अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि सीबीआइ की जांच में कई बड़े अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और उनको भी जेल जाना पड़ सकता है। इस प्रकरण में सेक्स रैकेट के साथ ही अनुदान व कई तरह के घपले किये गए है।
मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह बालिका, बाल गृह शिशु, विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण एवं स्वाधार गृह देवरिया की मान्यता शासन से स्थगित होने के बाद भी बालिकाएं, शिशु व महिलाओं को रखा जा रहा था। रविवार की रात इस संस्था से सेक्स रैकेट संचालित होने का पर्दाफाश होते ही शासन गंभीर हो गया।
बजट में भी गड़बड़ी होने की बात सामने आई है
विशेष हेलीकाप्टर से पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार व अपर पुलिस महानिदेशक महिला हेल्प लाइन अंजू गुप्ता को देवरिया भेजा गया। उनकी जांच में कई तरह की गड़बड़ी मिली है। संस्था की मान्यता रोकने के बाद भी इस संस्था को अधिकारियों ने प्रश्रय दिया और उसको कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। इसके बजट में भी गड़बड़ी होने की बात सामने आई है।
जांच के आदेश के बाद गिरिजा और उसकी बेटी की बढ़ी बैचेनी
मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआइ जांच कराने की बात कहने के बाद गिरिजा व कंचनलता के काफी नजदीक रहे आईएएस व कुछ वरिष्ठ आईपीएस की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है। गिरिजा व उसकी बेटी कंचनलता के मोबाइल काल डिटेल ही कई अफसरों के राज खोल देगी। साथ ही इस प्रकरण का पर्दाफाश न होने देने का एसपी पर दबाव बनाने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में आएंगे और उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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