यशवंत के लेख पर भाजपा में बढ़ा असमंजस

प्रदीप श्रीवास्तव

नयी दिल्लीः भाजपा से जुड़े दिग्गज देश की अर्थ व्यवस्था को लेकर एक के बाद एक कर जिस तरह चिंता जता रहे हैं, उसने सरकार और भाजपा को मुसीबत में डाल दिया है। पहले संघ के ‘थिंक टैंक’ माने जाने वाले गुरुमूर्ति की एक अंग्रेजी दैनिक में छपे लेख को लेकर अटकलें चल ही रही थीं कि वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा के लेख ने हंगामा मचा दिया है। इस लेख में यशवंत सिन्हा ने न केवल गिरती अर्थव्यवस्था के लिए ‘नोटबंदी’ और ‘बगैर तैयारी से लागू किए गए जीएसटी’ को जिम्मेदार ठहराया है, बल्कि यह भी कहा है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर फिर से आने में अभी काफी समय लगेगा।

गौरतलब यह है कि पिछले तीन-चार दिनों से विभिन्न आर्थिक संगठनों की आ रही रपट के साथ केंद्र सरकार के स्तर पर चल रही उच्च बैठकों से यह संदेश जनता के पास पहुंचना शुरू हो गया था कि देश में आर्थिक संकट का दौर शुरू हो गया है और सरकार अब खुद इसे परोक्ष तौर पर मानने लगी है। पर भाजपा सरकार में ही वित्त मंत्री रह चुके यशंवत सिन्हा के इस लेख ने विपक्ष को भी सरकार पर सीधे हमला करने का मौका दे दिया है। यहां तक कहा जाने लगा है कि सरकार के कामकाज से खुद भाजपा में भारी असंतोष है। कोई खुलकर नहीं कह पा रहा था। पर यशवंत सिन्हा के इस बयान के आने के बाद उनके लिए भी रास्ता खुल गया है। यशवंत सिन्हा के लेख पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि पूर्व वित्त मंत्री जब ऐसा कह रहे हैं तो मानना चाहिए। अर्थव्यवस्था के दोनों पंख टूट चुके हैं। जनता को सुरक्षा बेल्ट बांध लेना चाहिए। यूपीए सरकार वित्त मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने कहा कि यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री रह चुके हैं। उन्हें सत्ता का सच पता है।

कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यशवंत सिन्हा ने मोदी को सबका आईना दिखाया है। भाजपा द्वारा अर्थव्यवस्था के साथ किए खिलवाड़ का खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है। नोटबंदी और दोषपूर्ण जीएसटी का भार अब जनता के कंधों पर आ गिरा है। गैरतलब है कि पिछले सोमवार को भाजपा की कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक यहां खत्म हुई थी। इस बैठक में जिस तरह कार्यकारिणी के अलावा मुख्यमंत्री, विधायकों सहित करीब दो हजार लोगों को शामिल किया गया था, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। सूत्रों के मुताबिक इस विशाल बैठक को बुलाने के पीछे यही वजह थी कि भाजपा का नेतृत्व आर्थिक क्षेत्र से आ रही प्रतिक्रियाओं को लेकर चिंतित है। इसलिए वह चाहता है कि पूरी भाजपा पूर्णकालिक कार्यकर्ता की तरह सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार में जुट जाए। पार्टी नेतृत्व यह भी समझ रहा है कि पार्टी कैडर और नेता मौजूदा स्थिति को लेकर असहज हैं इसलिए उनमें सन् 2019 के चुनाव में पुनर्वापसी का विश्वास भरना जरूरी है। बैठक में प्रधानमंत्री, पार्टी अध्यक्ष, वित्त मंत्री सभी का भाषण इसी लाइन पर था। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव तक सीमित न रह कर चुनाव के ‘इतर’ पार्टी को जुड़ने का एक नया वाक्य दिया, जिसके कई अर्थ लगाए जा रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आर्थिक विशेषज्ञों और उच्च अधिकारियों के साथ इधर हुई बैठक को लेकर यशवंत सिन्हा ने अपने लेख में यह भी कहा कि किसी के पास कोई जादू की ऐसी छड़ी नहीं होती कि उसे घुमाए और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाए।

 

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