मोदी जी, कम कीजिए बंगाल के कर्ज का बोझ : ममता

नयी दिल्ली : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन परिसर में मुलाकात की। 15 मिनट की इस मुलाकात में सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बंगाल में हो रही भारी बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान और उससे राज्य के सामने उत्पन्न समस्याओं की जानकारी दी। उन्होंने राहत कार्य के लिए प्रधानमंत्री से इस मामले में आर्थिक सहायता की मांग की। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से पश्चिम बंगाल पर कर्ज के बढ़ते बोझ से उत्पन्न आर्थिक संकट की एक बार फिर चर्चा की और उनसे बंगाल सहित कर्ज के बोझ से दबे कुछ अन्य राज्यों को इस समस्या से निकालने के लिए केन्द्र की तरफ से वैकल्पिक रास्ता निकालने की अपील की। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से कहा कि मोदी जी मैं आपको एक बार फिर से यह बताना चाहूंगी कि बंगाल कर्ज के बोझ में है, इस पर आप विचार करें। प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के पहले ममता बनर्जी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी उनके निवास पर मुलाकात की थी। वित्त मंत्री से बातचीत में मुख्य मुद्दा कर्ज और राज्य पर उसके बढ़ते ब्याज को लेकर था। वित्त मंत्री से जीएसटी पर भी उनकी बात हुई। प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने भारी बारिश और बाढ़ की वजह से आई समस्या और नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री से विस्तार से बातचीत की। यह पूछने पर कि प्रधानमंत्री ने कुछ कहा, इस पर उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि दो लोग बात करेंगे तो दोनों ही कुछ न कुछ बोलेंगे ही। यह बात अलग है कि हमारी दिक्कतें हैं, ज्यादा मांग है तो हमारी तरफ से ज्यादा बात हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सारी बातें ध्यान से सुनी और कहा कि वे देखेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों के कर्ज को लेकर उन्होंने साफ्ट लोनिंग कर्ज को पुर्नगठित करने जैसे सुझाव दिए। वित्त मंत्री अरुण जेटली से हुई बातचीत का भी ममता बनर्जी ने ज्यादा खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि जेटली जी अच्छे आदमी हैं। उनको सारी बातें पता रहती हैं। प्रधानमंत्री मोदी से ममता बनर्जी की मुलाकात संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री आफिस में हुई थी। सीएम ने कहा कि फिलहाल बंगाल पर 2 लाख करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है। हमारा बजट 53,000 करोड़ रूपये का है और हमें ऋण वापसी के लिए 60,000 करोड़ रुपये अदा करना है। यह कैसे संभव हो सकता है।
ममता बनर्जी की कोशिश थी कि प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री राज्यों की इस दिक्कत को समझें और साफ्ट लोन, कर्ज का सरलीकरण कर या ‘कर्ज माफी’ जैसे कदम उठाकर कर्ज के बोझ से दबे राज्यों को थोड़ी राहत दें। पर वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री का रुख इस मामले में ठंडा रहा। ममता बनर्जी केन्द्र की राज्यों के प्रति बढ़ती कथित उपेक्षा को लेकर अपना रोष दो हफ्ते पहले यहां प्रधानमंत्री की अगुआई में हुई अंतरराज्यीय बैठक में ही जता चुकी थीं।

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